नागपुर: अगस्त महीने में बारिश के लंबे अंतराल ने जिले के खरीफ फसलों पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। औसत से बेहद कम बारिश होने के कारण फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है और किसानों में खरीफ उत्पादन बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में किसानों की उम्मीदें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर टिकी हैं, लेकिन संशोधित योजना में अपेक्षित नुकसानभरपाई की 25 प्रतिशत तक अग्रिम राशि देने का प्रावधान हटा दिया गया है।
अगस्त में बारिश की 71 प्रतिशत कमी
नागपुर जिले में अगस्त महीने में औसतन 286.4 मिमी बारिश अपेक्षित थी। इसके मुकाबले अब तक केवल 83.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके चलते अगस्त में बारिश की कमी करीब 71 प्रतिशत तक पहुंच गई है। बारिश में लंबे अंतराल का सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर दिखाई दे रहा है।
फसलें मुरझाईं, उत्पादन घटने का खतरा
बारिश नहीं होने से कई क्षेत्रों में फसलों की वृद्धि रुक गई है। कई जगह पत्तियां पीली पड़ रही हैं, फूल और फलियां गिर रही हैं तथा पौधे मुरझाने लगे हैं। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खरीफ उत्पादन में बड़ी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।
पहले मिलती थी 25 प्रतिशत तक अग्रिम राहत
फसल उत्पादन में भारी कमी की आशंका होने पर पहले अपेक्षित नुकसानभरपाई की 25 प्रतिशत तक अग्रिम राशि देने का प्रावधान था। लंबे समय तक बारिश नहीं होने या गंभीर प्रतिकूल परिस्थितियों में, जब चालू मौसम का संभावित उत्पादन सामान्य उत्पादन के 50 प्रतिशत से कम रहने की आशंका होती थी, तब इस व्यवस्था के तहत अग्रिम सहायता दी जा सकती थी। हालांकि, संशोधित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में यह प्रावधान हटा दिया गया है।
अब किसानों को फसल कटाई प्रयोग के आंकड़ों का इंतजार
किसानों ने फसल बीमा कराया है और योजना की आवश्यक शर्तें पूरी की हैं। लेकिन नुकसान की स्थिति में उन्हें फसल कटाई प्रयोग और अंतिम उत्पादन के आंकड़ों का इंतजार करना पड़ता है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के समय बीमा का लाभ समय पर और प्रभावी तरीके से मिलना चाहिए।
नागपुर जिले में 89,339 किसानों ने कराया बीमा
इस वर्ष नागपुर जिले में कुल 89,339 किसानों ने फसल बीमा कराया है। इनके 88,182.29 हेक्टेयर क्षेत्र को बीमा कवरेज के तहत शामिल किया गया है। ऐसे में बारिश की कमी से फसल प्रभावित होने पर बड़ी संख्या में किसानों की नजर अब बीमा योजना के तहत मिलने वाली राहत पर है।
भिवापुर से उमरेड तक हजारों किसान बीमित
जिले के विभिन्न तालुकों में बड़ी संख्या में किसानों ने फसल बीमा कराया है। मौदा तालुका में 16,765, सावनेर में 15,023, रामटेक में 8,169, नरखेड़ में 7,810, भिवापुर में 6,087 और उमरेड में 5,935 किसानों ने बीमा कराया है। अन्य तालुकों में भी हजारों किसान योजना के दायरे में हैं।
किसानों ने तत्काल सर्वेक्षण की मांग की
महाराष्ट्र किसान संगठन के प्रदेशाध्यक्ष भूषण कुंटे ने सरकार और बीमा कंपनियों से बारिश के लंबे अंतराल से प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वेक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संकटग्रस्त किसानों को समय पर राहत देने के लिए सरकार को 25 प्रतिशत अग्रिम नुकसानभरपाई देने का निर्णय लेना चाहिए।
नुकसानभरपाई का आधार क्या होगा?
संशोधित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नुकसानभरपाई संबंधित बीमा क्षेत्र घटक के औसत उत्पादन के आधार पर तय की जाती है। यदि चालू मौसम का औसत उत्पादन निर्धारित उंबरठा उत्पादन से कम रहता है तो उस क्षेत्र के बीमित किसानों को नुकसानग्रस्त माना जाता है। उंबरठा उत्पादन पिछले सात वर्षों के सर्वश्रेष्ठ पांच वर्षों के औसत उत्पादन और 70 प्रतिशत जोखिम स्तर के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

