रामटेक: ग्रामीण संस्कृति में पोला पर्व का विशेष महत्व है। बैलों की घटती संख्या और बढ़ती महंगाई के कारण पोला उत्सव का स्वरूप भले बदल रहा हो, लेकिन बच्चों के प्रिय तान्हा पोला का उत्साह आज भी बरकरार है। रामटेक की बाजारपेठ में इन दिनों लकड़ी के नंदी बैलों की दुकानें सज गई हैं, जहां इनकी कीमत 1,500 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
भोसलेकालीन परंपरा से जुड़ा है तान्हा पोला
रामटेक में तान्हा पोला की परंपरा को भोसलेकालीन विरासत से जोड़ा जाता है। इस अवसर पर बच्चे सजाए गए लकड़ी के नंदी बैलों को लेकर उत्साहपूर्वक पर्व मनाते हैं। परंपरा के प्रति लोगों की आस्था आज भी कायम है।
लकड़ी और रंग महंगे होने से बढ़ी कीमत
नंदी बैल बनाने वाले कलाकारों के अनुसार, लकड़ी, रंग और अन्य आवश्यक सामग्री की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके अलावा एक लकड़ी का बैल तैयार करने में करीब 2 से 3 दिन का समय लगता है। इसी वजह से इस वर्ष नंदी बैलों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
1,500 से 40 हजार रुपये तक नंदी बैल
रामटेक के बाजार में अलग-अलग आकार, डिजाइन और सजावट वाले लकड़ी के नंदी बैल उपलब्ध हैं। इनकी कीमत सामान्य मॉडल के लिए करीब 1,500 रुपये से शुरू होकर विशेष और आकर्षक डिजाइन वाले नंदी बैलों के लिए 40 हजार रुपये तक पहुंच रही है।
पिंपळेश्वर हनुमान मंदिर से शास्त्री चौक तक रौनक
तान्हा पोला के अवसर पर पिंपळेश्वर हनुमान मंदिर, शास्त्री चौक और लंबे हनुमान मंदिर परिसर में बड़ी भीड़ उमड़ती है। विभिन्न मंडलों की ओर से नंदी बैलों की सजावट और बच्चों की वेशभूषा के लिए नकद पुरस्कार भी दिए जाते हैं। ऐसे में महंगाई के बावजूद अभिभावक बच्चों की खुशी के लिए नंदी बैल खरीद रहे हैं।
महंगाई के बीच भी बच्चों में उत्साह बरकरार
महंगाई के कारण खरीदारों की संख्या में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन संस्कृति और श्रद्धा का उत्साह कम नहीं हुआ है। बाजार में बच्चे और उनके अभिभावक लकड़ी के नंदी बैल खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं। तान्हा पोला को लेकर बालगोपालों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

