स्थिति का विवरण
नागपुर में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं यानी नगरपालिका, महानगरपालिका और जिला परिषद स्कूलों में छात्रों की संख्या में पिछले चार वर्षों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार इन स्कूलों में 1 लाख 37 हजार छात्रों की कमी हुई है, जो शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है।
शिक्षा विभाग की नई योजना
इस गिरावट को रोकने और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 में 100 प्रतिशत प्रवेश का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक विशेष योजना के तहत अधिकारियों को स्कूलों को दत्तक (Adopt) लेने की व्यवस्था की जाएगी।
स्कूल दत्तक योजना क्या है?
इस योजना के तहत शिक्षा विभाग के विभिन्न अधिकारी एक वर्ष के लिए अलग-अलग स्कूलों को गोद लेंगे। ये अधिकारी पूरे वर्ष स्कूलों का नियमित निरीक्षण करेंगे और छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता, स्कूलों की भौतिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं की जांच करेंगे तथा सुधार के लिए मार्गदर्शन देंगे।
किन अधिकारियों को जिम्मेदारी मिलेगी
इस योजना के तहत कई स्तर के शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिनमें शामिल हैं
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्राचार्य, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा अधिकारी, योजना शिक्षा अधिकारी, वरिष्ठ अधिव्याख्याता, उप शिक्षा अधिकारी, गट शिक्षा अधिकारी, अधीक्षक एवं विस्तार शिक्षा अधिकारी।
कार्य योजना और निगरानी
राज्य स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर मार्च से जून तक विशेष कार्य योजना तैयार की गई है। इसके अलावा पूरे वर्ष स्कूलों में विभिन्न गतिविधियाँ और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि नामांकन बढ़ाया जा सके और छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके। शिक्षा विभाग ने महानगरपालिका आयुक्तों और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में स्कूलों में प्रवेश संख्या बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
प्रवेश बढ़ाने के लिए विशेष अभियान
शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसमें स्थानीय प्रशासन और शिक्षा अधिकारियों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाएगी ताकि अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में हो सके।
पहले दिन का विशेष कार्यक्रम
शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के पहले दिन सरकारी स्कूलों में भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की स्कूल यात्राएं, जनप्रतिनिधियों की सहभागिता, स्कूल स्वच्छता अभियान, छात्रों की प्रभात फेरी, “पहला कदम” के तहत बच्चों के पैरों के निशान लेने का उपक्रम तथा मुफ्त पाठ्यपुस्तक और यूनिफॉर्म वितरण जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे।
निष्कर्ष
सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या को रोकने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों में फिर से छात्रों की संख्या बढ़ेगी।

