महाराष्ट्र में इंसान और वन्यजीव संघर्ष का खौफनाक सच, 6 साल में 501 लोगों की मौत

RTI रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

महाराष्ट्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। एक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 6 वर्षों में राज्यभर में वन्यजीवों के हमलों में 501 लोगों की मौत हुई है। इस आंकड़े ने वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

जंगलों के आसपास बढ़ रहा खतरा

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विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों के घटते क्षेत्र और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर ग्रामीण और वन क्षेत्र से सटे इलाकों में लोगों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

बाघ, तेंदुआ और जंगली जानवर बने जानलेवा

रिपोर्ट में सामने आया है कि बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य जंगली जानवरों के हमलों में सैकड़ों लोगों की जान गई। कई मामलों में खेतों में काम कर रहे किसान और जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीण शिकार बने।

विदर्भ क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। नागपुर, चंद्रपुर, गढ़चिरौली और गोंदिया जैसे जिलों में बाघ और तेंदुओं की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

सरकार और वन विभाग पर उठे सवाल

इतनी बड़ी संख्या में मौतें सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं और वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों में डर का माहौल

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लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल है। कई गांवों में लोग शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।

मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए जंगल संरक्षण, सुरक्षित कॉरिडोर और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है।

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