नागपुर: महाराष्ट्र में अवैध सूदखोरी पर रोक लगाने के लिए कानून लागू होने और समय-समय पर पुलिस कार्रवाई के बावजूद नागपुर में अवैध साहूकारों का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। ताजा मामला अजनी थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक कारोबारी से ₹3.50 लाख का कर्ज देने के बदले ₹16 लाख की वसूली किए जाने का आरोप लगा है। इतना ही नहीं, अधिक रकम वसूलने के बाद भी आरोपियों ने पीड़ित को जान से मारने, झूठे मामलों में फंसाने और उसकी संपत्ति पर कब्जा करने की धमकियां दीं।
आर्थिक संकट का फायदा उठाकर फंसाया जाल में
शिकायतकर्ता प्रसाद विष्णुकांत कुंभरे का आर.जे. बॉटलिंग प्लांट आर्थिक संकट से गुजर रहा था। कर्मचारियों का भुगतान करने और कारोबार जारी रखने के लिए उन्हें तत्काल धन की आवश्यकता थी।
इसी दौरान एक परिचित ने उनकी मुलाकात कथित अवैध साहूकार कमलेश गणपतराव हनोते और उसकी सहयोगी अनिता पुरणलाल भारद्वाज से कराई। जुलाई 2024 में मेडिकल चौक पर हुई मुलाकात में आरोपियों ने ₹3.50 लाख नकद दिए और उस पर 10 प्रतिशत ब्याज लेने की बात कही।
₹16 लाख चुकाने के बाद भी खत्म नहीं हुआ कर्ज
व्यवसाय में लगातार नुकसान होने के कारण शिकायतकर्ता तय समय पर रकम नहीं लौटा सके। इसके बाद ब्याज लगातार बढ़ता गया।
शिकायत के अनुसार, प्रसाद विष्णुकांत कुंभरे ने आरोपियों के कहने पर ऑनलाइन ट्रांसफर और नकद भुगतान के जरिए अलग-अलग खातों में कुल ₹16 लाख जमा किए। यानी मूल रकम से साढ़े चार गुना से अधिक राशि चुकाने के बावजूद कथित कर्ज समाप्त नहीं हुआ और आरोपियों ने अतिरिक्त रकम की मांग जारी रखी।
जान से मारने और झूठे केस में फंसाने की धमकी
पीड़ित का आरोप है कि जब उसने और पैसे देने में असमर्थता जताई तो कमलेश गणपतराव हनोते और अनिता पुरणलाल भारद्वाज ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने तथा झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने शिकायतकर्ता को छोटा ताजबाग इलाके में बुलाकर उसके बॉटलिंग प्लांट के अनुबंध दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर भी करवा लिए। आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई संपत्ति पर कब्जा करने की मंशा से की गई।
अवैध सूदखोरी के बदलते तरीके बने चिंता का विषय
रिपोर्ट के अनुसार, पहले अवैध साहूकार नकद लेन-देन कर ऊंचे ब्याज पर रकम देते थे, लेकिन अब ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल, संपत्ति के दस्तावेज अपने कब्जे में लेना, खाली कागजों या एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कराना और मानसिक दबाव बनाकर अधिक से अधिक रकम वसूलने जैसे तरीके अपनाए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र सूदखोरी कानून के बावजूद जारी हैं ऐसे मामले
महाराष्ट्र सूदखोरी (विनियमन) अधिनियम लागू होने के बावजूद ऐसे मामलों में कमी नहीं आई है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे छोटे उद्योगपति, व्यापारी और आम नागरिक तत्काल कर्ज की जरूरत के चलते निजी साहूकारों के चंगुल में फंस जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदनामी का डर, लगातार मिल रही धमकियां और सामाजिक दबाव के कारण अधिकांश पीड़ित पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते। ऐसे में सामने आने वाले मामले वास्तविक स्थिति का केवल एक छोटा हिस्सा हैं।
अजनी पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस मामले में अजनी पुलिस ने कमलेश गणपतराव हनोते और अनिता पुरणलाल भारद्वाज के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

