3 साल बाद भी नहीं मिला सना खान का शव, मर्डर मिस्ट्री बरकरार; मुख्य आरोपी समेत 5 आरोपी जेल में

नागपुर: भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की पदाधिकारी सना खान (हीना कौसर खान) की कथित हत्या के मामले को तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी पप्पू उर्फ अमित शाहू समेत पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन अब तक सना खान का शव बरामद नहीं हो सका है। इसी वजह से यह मर्डर मिस्ट्री आज भी रहस्य बनी हुई है।

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सोशल मीडिया से हुई थी पहचान, बाद में हुई शादी

जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए सना खान की पहचान जबलपुर के कारोबारी पप्पू उर्फ अमित शाहू से हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और 24 अप्रैल 2023 को शादी होने की बात सामने आई। इसके बाद सना नागपुर और जबलपुर के बीच आना-जाना करती थीं तथा स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़ने लगी थीं।

पैसों और निजी विवाद ने लिया हिंसक रूप

बताया जाता है कि समय के साथ दोनों के बीच आर्थिक लेन-देन और कुछ निजी वीडियो को लेकर विवाद बढ़ गया। 1 अगस्त 2023 को दोनों के बीच फोन पर तीखी बहस हुई, जिसके बाद सना उसी रात नागपुर से बस द्वारा जबलपुर के लिए रवाना हो गईं। घर से निकलते समय उन्होंने परिजनों से कहा था कि वह दो-तीन दिन में लौट आएंगी।

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आखिरी फोन कॉल के बाद दोनों मोबाइल हुए बंद

2 अगस्त की सुबह सना ने नागपुर स्थित अपने एक रिश्तेदार को फोन कर जबलपुर पहुंचने की जानकारी दी और अपने 13 वर्षीय बेटे के बारे में पूछा। इसके कुछ घंटों बाद उनके दोनों मोबाइल फोन बंद हो गए। लगातार संपर्क नहीं होने पर उनकी मां ने मानकापुर पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

घर में मिले खून के निशान, आरोपी ने कबूला हत्या का आरोप

जांच के दौरान पुलिस जब पप्पू उर्फ अमित शाहू के जबलपुर स्थित घर पहुंची तो वहां किसी का पता नहीं चला, लेकिन घर में फिनाइल की तेज गंध थी। फोरेंसिक जांच में सोफे, दीवार और वॉशरूम से खून के निशान मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया।

पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि करीब 15 से 17 लाख रुपये के विवाद में उसने लकड़ी के डंडे से हमला कर सना खान की हत्या की। इसके बाद शव को कालीन में लपेटकर कार में रखा और साथियों की मदद से हिरण नदी के पुल से नीचे फेंक दिया। इस मामले में राजेश ठाकुर, धर्मेंद्र यादव, रवीशंकर उर्फ रब्बू यादव और कमलेश पटेल को भी सह-आरोपी बनाया गया।

तीन साल बाद भी नहीं मिला शव

पुलिस के अनुसार घटना के समय भारी बारिश और नदी में आई बाढ़ के कारण शव की तलाश बेहद मुश्किल हो गई। नदी में मगरमच्छों की मौजूदगी और आसपास घने जंगल होने से लंबे समय तक सर्च ऑपरेशन चलाने के बावजूद सना खान का शव बरामद नहीं हो सका।

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पुलिस का दावा- मजबूत सबूतों के आधार पर मिलेगी सजा

मामले की जांच डीसीपी राहुल मदने की निगरानी में हुई। पुलिस का कहना है कि भले ही शव बरामद नहीं हुआ है, लेकिन जांच में पर्याप्त और मजबूत साक्ष्य जुटाए गए हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर आरोपियों को अदालत से सजा मिलने की उम्मीद जताई गई है।

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