मुंबई: देश के प्रख्यात शिक्षाविद, समाजसेवी और बिहार, त्रिपुरा तथा पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल पद्मश्री डॉ. दयानंद (ज्ञानदेव यशवंतराव) डी. वाय. पाटिल का सोमवार को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन से देश के शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
शिक्षा के क्षेत्र में दिया अमूल्य योगदान
22 अक्टूबर 1935 को जन्मे डॉ. डी. वाय. पाटिल ने अपना जीवन शिक्षा के विस्तार और समाज सेवा को समर्पित किया। उन्होंने देशभर में चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, कृषि और अन्य पेशेवर शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
182 से अधिक शिक्षण संस्थानों का किया निर्माण
डी. वाय. पाटिल ग्रुप के माध्यम से उन्होंने देश के सबसे बड़े निजी शैक्षणिक नेटवर्क में से एक की स्थापना की। इस समूह के अंतर्गत 182 से अधिक शैक्षणिक संस्थान, 7 डीम्ड विश्वविद्यालय, अंतरराष्ट्रीय स्कूल और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल संचालित हैं, जहां वर्षों से लाखों विद्यार्थियों ने शिक्षा प्राप्त की है।
राजनीति और प्रशासन में भी निभाई अहम भूमिका
शिक्षा के अलावा डॉ. डी. वाय. पाटिल ने राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे और बाद में त्रिपुरा, बिहार तथा पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं। अपने कार्यकाल के दौरान वे प्रशासनिक दक्षता और जनसंपर्क के लिए भी जाने गए।
देशभर में शोक की लहर
डॉ. डी. वाय. पाटिल के निधन को भारतीय शिक्षा जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व और संस्थागत विकास के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

