नागपुर: मेडिकल से संबद्ध सुपरस्पेशालिटी अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में सुबह के समय मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पंजीकरण से लेकर चिकित्सक को दिखाने और विभिन्न जांच कराने तक मरीजों को लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी रक्त और मूत्र के नमूने देने में हो रही है।
नमूना संग्रह कक्ष के बाहर लंबी कतारें
अस्पताल के कक्ष क्रमांक 6 में रक्त और मूत्र के नमूने एकत्र किए जाते हैं। सुबह से ही इस कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग जाती हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण नमूने स्वीकार करते समय गड़बड़ी होने की आशंका बनी रहती है। कुछ मामलों में नमूने बदलने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है।
प्रतिदिन 300 नमूने लिए जाते हैं
कक्ष क्रमांक 6 में प्रतिदिन लगभग 300 मरीजों के नमूने लिए जाते हैं। इनमें करीब 150 नमूने विकृति विज्ञान विभाग और 150 नमूने जैव रसायन विभाग के होते हैं। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद नमूना संग्रह की व्यवस्था में आवश्यक विस्तार नहीं किया गया है।
गलत नमूना उपचार पर पड़ सकता है भारी
जांच रिपोर्ट चिकित्सकों के उपचार का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में नमूने की पहचान, सुरक्षित रखे जाने या जांच के लिए भेजे जाने में हुई गलती मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है। नमूना गुम होने या गलत दर्ज होने पर मरीज को दोबारा नमूना देना पड़ सकता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है तथा उपचार में भी देरी हो सकती है।
कंत्राटी कर्मचारियों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
नमूना संग्रह की पूरी प्रक्रिया में विशेष सावधानी आवश्यक होती है। नमूने की सही पहचान, सुरक्षित भंडारण और सही मरीज तक सही रिपोर्ट पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन इस व्यवस्था की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कंत्राटी कर्मचारियों के माध्यम से निभाई जा रही हैं। इससे व्यवस्था की निगरानी और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
मरीज बढ़े, लेकिन व्यवस्था जस की तस
सुपरस्पेशालिटी अस्पताल की ओपीडी में एक सप्ताह के दौरान लगभग 4 हजार मरीज पहुंचते हैं। इनमें करीब 50 प्रतिशत मरीजों को विभिन्न जांचों की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद नमूना संग्रह की व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं किया गया है।
दोपहर 1 बजे के बाद नहीं लिए जाते नमूने
कक्ष क्रमांक 6 में दोपहर 1 बजे तक ही नमूने लिए जाते हैं। यदि किसी मरीज की चिकित्सक से जांच दोपहर 12.30 बजे पूरी होती है और उसके बाद नमूना देना हो, तो कक्ष बंद हो चुका होता है। ऐसे मरीजों को अगले दिन दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। बाहर से आने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से परेशानी का कारण बन रही है।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
प्रतिदिन सैकड़ों नमूने लिए जाने के कारण नमूना स्वीकार करने से लेकर जांच, रिपोर्ट तैयार करने और मरीज तक पहुंचाने तक हर चरण की कड़ी निगरानी आवश्यक है। लेकिन प्रभावी निगरानी के अभाव में गड़बड़ी की आशंका बनी हुई है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नमूना संग्रह केंद्र में अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था और बेहतर निगरानी तंत्र लागू करने की आवश्यकता है।

