भिवापुर: खरकाळा के मयूर करपाते हत्याकांड का खुलासा आरोपी के आत्मसमर्पण के बाद हो गया है, लेकिन हत्या से जुड़े कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। घटनास्थल के दृश्य और आरोपी के दावों में सामने आ रही विसंगतियों ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। अब फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
मुंडका धड़ से 5-6 फीट दूर मिला
गांव के बाहर सुनसान झाड़ियों में मयूर का सड़ा-गला शव मिला था। उस समय उसका सिर धड़ से करीब 5 से 6 फीट दूर पड़ा मिला था। आरोपी रामदास नेवारे (50) के अनुसार, 23 अगस्त की रात मयूर लोहे की रॉड लेकर उसके घर में घुसा था। रामदास ने कथित तौर पर वही रॉड छीनकर उसके सिर पर वार किया था।
लोहे की रॉड से सिर अलग होने पर सवाल
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल लोहे की रॉड से किए गए प्रहार से सिर धड़ से अलग हो सकता है? शव के सड़ने या किसी जानवर द्वारा उसे खींचे जाने से सिर अलग हुआ अथवा किसी धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया, यह फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अकेले शव ले जाने के दावे पर भी संदेह
मयूर की उम्र 24 वर्ष थी, जबकि आरोपी रामदास की उम्र 50 वर्ष है। ऐसे में आरोपी द्वारा अकेले मयूर के शव को कंधे पर उठाकर गांव से बाहर ले जाकर फेंकने के दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या हत्या में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
हत्या का कारण अब भी रहस्य
मयूर रात में अचानक लोहे की रॉड लेकर रामदास के घर क्यों पहुंचा, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। दोनों के बीच पुराना विवाद, आर्थिक लेन-देन या कोई पारिवारिक कारण था, इसकी जांच की जा रही है।
आठ दिनों के घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस
हत्या के बाद खून से सने कपड़े फेंकना, फिर ससुराल में जाकर छिपना और अंत में चिमूर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने तक के करीब आठ दिनों के घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। पुलिस अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर मयूर हत्याकांड का पूरा सच सामने लाने में जुटी है।

