नागपुर के डागा महिला अस्पताल में बड़ा हादसा टला
नागपुर के डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल में बुधवार सुबह अचानक नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (SNCU) में धुआं फैलने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के दौरान वहां भर्ती नवजात बच्चों की जान खतरे में आ गई थी, लेकिन एक नर्स की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।
स्विच बोर्ड से निकली चिंगारी, वार्ड में भर गया धुआं
जानकारी के अनुसार, 13 मई की सुबह करीब 9:45 बजे SNCU वार्ड में 36 नवजात बच्चों का इलाज चल रहा था। इसी दौरान एक स्विच बोर्ड से अचानक चिंगारियां निकलने लगीं और देखते ही देखते पूरे वार्ड में धुआं फैल गया।
नर्स की सतर्कता से बची 10 मासूमों की जान
ड्यूटी पर मौजूद नर्स रोशनी मडामे ने तत्काल मेन स्विच बंद किया और अन्य नर्सों की मदद से 10 नवजात बच्चों को तुरंत दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया। उनकी सूझबूझ और बहादुरी के कारण बड़ा हादसा होने से बच गया।
भंडारा अस्पताल हादसे की याद से कांप उठे लोग
घटना के बाद वर्ष 2021 में हुए भंडारा जिला अस्पताल अग्निकांड की दर्दनाक यादें फिर ताजा हो गईं। उस हादसे में कई नवजात बच्चों की मौत हो गई थी। डागा अस्पताल में धुआं फैलते ही परिजनों और अस्पताल स्टाफ में दहशत फैल गई।
6 बच्चों को मेयो और मेडिकल अस्पताल भेजा गया
जिन बच्चों को सांस लेने के लिए विशेष मशीनों की जरूरत थी, उनमें से 6 नवजातों को तुरंत मेयो और मेडिकल अस्पताल भेजा गया, जबकि 4 बच्चों को डागा अस्पताल के दूसरे वार्ड में स्थानांतरित किया गया।
सभी नवजात सुरक्षित, हालत स्थिर
डागा अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. दिलीप मडावी ने बताया कि सभी 10 बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है और वे सुरक्षित हैं। समय रहते की गई कार्रवाई के कारण बड़ा नुकसान टल गया।
अस्पताल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि नियमित इलेक्ट्रिकल ऑडिट किया गया था, तो फिर शॉर्ट सर्किट कैसे हुआ? कई अभिभावकों ने प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जताई है।
अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई
अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया है कि SNCU वार्ड में आग नहीं लगी थी, बल्कि शॉर्ट सर्किट के कारण धुआं निकला था। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है।

