तेज आंधी और बारिश से अचानक बदला मौस
नागपुर जिले के काटोल तालुका में गुरुवार (7 मई) दोपहर तेज आंधी के साथ बेमौसम बारिश हुई। कई इलाकों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। विशेष रूप से सब्जी उत्पादकों और संतरा-मौसंबी बागान मालिकों को बड़ा आर्थिक झटका लगा है।
बारिश और बिजली की गड़गड़ाहट से लोगों में दहशत
पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से लोग परेशान थे। इसी बीच गुरुवार दोपहर अचानक मौसम ने करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए और कुछ ही देर में तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई।
अचानक हुई बारिश के कारण सड़क पर मौजूद लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं तेज बिजली की गड़गड़ाहट और चमक से महिलाओं और बच्चों में डर का माहौल बन गया।
कोतवाल बर्डी क्षेत्र में गारों की मोटी परत जमी
तालुका के कोतवाल बर्डी इलाके में भारी ओलावृष्टि हुई, जिसके चलते घरों की छतों और सड़कों पर गारों की मोटी परत जम गई।
आंधी के कारण कुछ गांवों में बिजली आपूर्ति भी कुछ समय के लिए बाधित रही। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कहीं से भी जानमाल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान
काटोल तालुका में बड़ी मात्रा में बागायती खेती की जाती है। यहां किसान सालभर विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती करते हैं। लेकिन इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बैंगन, टमाटर, भिंडी, करेला, ढेमस समेत कई सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गईं।
किसानों का कहना है कि सब्जी फसलों पर फसल बीमा का सुरक्षा कवच नहीं होता, जिसके कारण प्राकृतिक आपदा में नुकसान की भरपाई नहीं मिलती। किसानों ने सरकार से विशेष आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
संतरा और मौसंबी की फलों का भारी गिराव
काटोल तालुका संतरा और मौसंबी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। फिलहाल बागानों में अंबिया बहार के छोटे फल लगे हुए हैं। ओलावृष्टि के कारण बड़ी संख्या में ये फल पेड़ों से टूटकर गिर गए।
बारिश के बाद बढ़ी नमी के कारण आने वाले दिनों में फलों के और अधिक गिरने की आशंका जताई जा रही है। इससे संतरा और मौसंबी उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
किसानों ने सरकार से मांगी तत्काल मदद
किसानों ने मांग की है कि कृषि और राजस्व विभाग की टीमों द्वारा तुरंत नुकसान का पंचनामा किया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए।
किसानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है और ऐसी प्राकृतिक आपदाओं में सरकार को तत्काल राहत प्रदान करनी चाहिए।

