नागपुर: तकनीक और इंसानियत की मिसाल पेश करने वाला एक भावुक मामला नागपुर से सामने आया है, जहां आधार बायोमेट्रिक सिस्टम की मदद से दो साल से लापता एक किशोरी की पहचान आखिरकार हो गई। मानसिक रूप से अस्वस्थ हालत में मिली इस किशोरी को अब उसके परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
2024 में खापरखेड़ा इलाके में मिली थी किशोरी
जानकारी के अनुसार, सितंबर 2024 में खापरखेड़ा के पीडब्ल्यूसीईएन कॉलोनी क्षेत्र में एक किशोरी बेहद कमजोर और असहाय हालत में मिली थी। उस समय उसे अपना नाम, पता या परिवार के बारे में कुछ भी याद नहीं था। पुलिस ने उसे रेस्क्यू कर नागपुर के म्हसाला स्थित आशा किरण बालगृह केयर एंड सपोर्ट सेंटर में भेज दिया था।
दो साल तक नहीं मिली कोई पहचान
बालगृह और प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन किशोरी की पहचान से जुड़ा कोई दस्तावेज या सुराग नहीं मिल सका। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह अपने परिवार या गांव के बारे में भी कुछ बता नहीं पा रही थी। इसके चलते मामला लंबे समय तक अधर में लटका रहा।
आधार के ‘Find Aadhaar’ फीचर से मिला बड़ा सुराग
17 अप्रैल को अधिकारियों ने किशोरी के अंगूठे के निशान लेकर UIDAI के ‘Find Aadhaar’ बायोमेट्रिक फीचर के जरिए जांच की। जांच में उसकी बायोमेट्रिक जानकारी उत्तर प्रदेश के एक पुराने आधार रिकॉर्ड से मैच हो गई। इसके बाद किशोरी की असली पहचान सामने आई और उसके परिवार का पता चल सका।
परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू
आधिकारिक सत्यापन के बाद अब चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और अन्य कानूनी संस्थाओं की मदद से किशोरी को सुरक्षित रूप से उसके परिवार तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। बालगृह प्रशासन ने इसे “एक जिंदगी को दोबारा पहचान मिलने” जैसा भावुक पल बताया।
तकनीक बनी उम्मीद की किरण
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सही तरीके से इस्तेमाल की गई तकनीक न सिर्फ पहचान दिला सकती है, बल्कि बिछड़े लोगों को उनके अपनों से भी मिला सकती है। नागपुर में इससे पहले भी आधार प्रणाली की मदद से कई लापता लोगों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है।

