नागपुर: धंतोली इलाके से पिछले 15 दिनों से लापता परसवानी परिवार के पांचों सदस्यों को पुलिस ने आखिरकार पुणे में सुरक्षित खोज निकाला। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भारी कर्ज और वसूली के दबाव के कारण परिवार ने अचानक नागपुर छोड़ने का फैसला लिया था।
15 दिन पहले अचानक लापता हुआ पूरा परिवार
24 जून 2026 को शाम करीब 6 बजे हर्षा परसवानी (57), जितेंद्र परसवानी (45), ईशिता परसवानी (40), खुशी परसवानी (21) और 12 वर्षीय कृष्णा अचानक घर से निकल गए थे। इसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हुआ, जिससे परिवार और पुलिस में हड़कंप मच गया।
CCTV और मोबाइल लोकेशन से मिला सुराग
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सैकड़ों CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान परिवार का आखिरी लोकेशन पुणे में ट्रेस हुआ, जिसके बाद पुलिस टीम तुरंत रवाना हुई।
ATM ट्रांजैक्शन से जांच को मिली दिशा
पुणे पहुंचने के बाद जांच में सामने आया कि परिवार ने पिंपरी-चिंचवड़ के एक ATM से पैसे निकाले थे। इसके बाद पुलिस ने उस इलाके के CCTV फुटेज खंगाले और परिवार की मूवमेंट को ट्रैक करते हुए उनके ठिकाने तक पहुंच गई।
रिश्तेदार के घर छिपा था पूरा परिवार
जांच में खुलासा हुआ कि पूरा परिवार पुणे में अपने एक रिश्तेदार के यहां शरण लिए हुए था। पुलिस ने सभी से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने बताया कि कर्जबाजारी और वसूली के दबाव से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
जितेंद्र परसवानी पर था कर्ज का बोझ
पुलिस के अनुसार जितेंद्र परसवानी एक डेली नीड्स (किराना) दुकान चलाते हैं और पूरे कारोबार की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। कारोबार के चलते उन्होंने कर्ज लिया था और कर्जदाताओं के लगातार दबाव और तगादे के कारण परिवार ने अचानक शहर छोड़ दिया।
पुलिस ने बंद की सर्च ऑपरेशन
चूंकि परिवार के सभी सदस्य सज्ञान (वयस्क) हैं और सुरक्षित पाए गए हैं, इसलिए पुलिस ने बेपत्ता मामला बंद कर दिया है। इस पूरी जांच में पीएसआई महामुनी और प्रवीण गवळी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कर्ज के दबाव से उठाए जा रहे खतरनाक कदम
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि कर्ज और निजी वसूली का दबाव लोगों को मानसिक रूप से इतना तोड़ देता है कि वे अचानक घर छोड़ने जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसी स्थिति में कानून का सहारा लें।

