पचखेडी में पोषण आहार कर्मियों का दो महीने का मानधन अटका, पोला पर्व पर आर्थिक संकट
पचखेडी: विद्यार्थियों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने वाले स्कूली पोषण आहार कर्मचारियों का जुलाई और अगस्त महीने का मानधन लंबित है। पोला पर्व के ऐन मौके पर दो महीने का मानधन नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के इन कर्मचारियों के सामने घर खर्च और त्योहार मनाने का संकट खड़ा हो गया है। मानधन में देरी को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है।
दो महीने से नहीं मिला मानधन
पोषण आहार कर्मचारी रोजाना विद्यार्थियों के लिए समय पर भोजन तैयार करने, उसे परोसने और रसोईघर की सफाई जैसी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसके बावजूद जुलाई और अगस्त का मानधन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। कम मानधन में पहले से ही परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है और भुगतान में दो-दो महीने की देरी ने परेशानी और बढ़ा दी है।
पोला पर्व पर आर्थिक संकट
ग्रामीण क्षेत्रों में पोला प्रमुख त्योहारों में शामिल है। ऐसे में कर्मचारियों को समय पर मानधन नहीं मिलने के कारण त्योहार की खरीदारी और घरेलू खर्च का आर्थिक गणित बिगड़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और त्योहार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
1 हजार रुपये मानधन बढ़ाने का आश्वासन भी अधूरा
सरकार ने वर्ष 2025 से मानधन में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, इस बढ़ोतरी को लागू करने संबंधी आधिकारिक शासन निर्णय अब तक जारी नहीं हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़े हुए मानधन का इंतजार तो है ही, साथ में मौजूदा मानधन भी समय पर नहीं मिल रहा है।
कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष
मानधन भुगतान में लगातार देरी और प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू नहीं होने से कर्मचारियों में तीव्र नाराजगी है। उनका कहना है कि वे रोजाना विद्यार्थियों के लिए समय पर भोजन तैयार करते हैं, लेकिन उनके ही मेहनताने का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है।
बकाया मानधन तत्काल जमा करने की मांग
चाड़ा की पोषण आहार कर्मचारी रविता घरडे ने कहा कि दो-दो महीने तक मानधन अटकने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर बकाया मानधन तत्काल जमा करने की मांग की है।

