नागपुर जिले के सावनेर तहसील के कोटोडी गांव में कोयला खनन ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। गांव और जिला परिषद विद्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर खनन कार्य चल रहा है। रोजाना होने वाले विस्फोटों से धरती कांप उठती है और ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। वहीं, गांव का पुनर्वास अब तक लंबित है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उन्हें इस डर के बीच और कितने दिन रहना पड़ेगा?
रोजाना विस्फोटों से दहशत में ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, प्रतिदिन दोपहर करीब ढाई से तीन बजे के बीच खदान क्षेत्र में सायरन बजाया जाता है। कई बार सायरन भी नहीं बजता और अचानक विस्फोट की आवाज सुनाई देती है। तेज धमाकों से आसपास का पूरा क्षेत्र हिल जाता है। विस्फोटों के कारण गांव की कई इमारतों में दरारें पड़ने की शिकायत ग्रामीणों ने की है।
विद्यालय से महज 100 मीटर दूर खनन कार्य
कोटोडी में जिला परिषद का कक्षा 1 से 4 तक का विद्यालय है, जिसमें 15 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसके अलावा पांच बच्चे आंगनवाड़ी में आते हैं। विद्यालय के बेहद करीब खनन और विस्फोट होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
धूल और प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर
खदान से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों के माध्यम से कोयला और मिट्टी का परिवहन किया जाता है। इससे पूरे क्षेत्र में धूल फैलती है। ग्रामीणों के अनुसार, धूल और प्रदूषण के कारण शरीर पर लाल चकत्ते, खुजली तथा सांस से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं।
धूल रोकने के लिए लगाई गई जाली बनी परेशानी
विद्यालय में धूल प्रवेश न करे, इसके लिए वेकोली प्रशासन की ओर से हरी जाली लगाई गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जाली लगाने के बाद कक्षाओं में हवा का आवागमन प्रभावित हो गया है और बच्चों तथा शिक्षकों को सांस लेने में परेशानी होती है।
ऑनलाइन काम के लिए नेटवर्क भी नहीं
विद्यालय के अधिकांश काम अब ऑनलाइन किए जा रहे हैं। लेकिन पास स्थित डंपिंग यार्ड के कारण मोबाइल नेटवर्क का कवरेज नहीं मिल पाता। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मंजुषा कोल्हे ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में विद्यालय के ऑनलाइन काम कैसे किए जाएं?
जर्जर विद्यालय भवन से विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल
गांव का पुनर्वास प्रस्तावित होने के कारण विद्यालय भवन की मरम्मत भी नहीं हो पा रही है। वहीं, लगातार होने वाले विस्फोटों के कारण भवन में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। ग्रामीणों और विद्यालय प्रशासन को आशंका है कि भवन का कोई हिस्सा अचानक गिर सकता है, जिससे विद्यार्थियों की जान को खतरा हो सकता है।
विद्यार्थियों को दूसरे विद्यालय में भेजने की मांग
प्रधानाध्यापिका मंजुषा कोल्हे ने जिला परिषद विद्यालय और आंगनवाड़ी में पढ़ने वाले करीब 20 विद्यार्थियों को डेढ़ किलोमीटर दूर पंधराखेड़ी स्थित विद्यालय में स्थानांतरित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वेकोली प्रशासन को बस की व्यवस्था करनी चाहिए।
दूषित पानी ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, पहले गांव में कुएं से पानी पहुंचाया जाता था। अब बोरवेल का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन यह पानी दूषित होने की शिकायत है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी में कोयले के बारीक कण तैरते दिखाई देते हैं, जिससे स्वास्थ्य को खतरा बना हुआ है।
शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग
गांव के निवासी महेद बोंडे ने प्रशासन से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दूषित पानी के कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पुनर्वास का इंतजार, ग्रामीणों का सवाल कायम
खनन, विस्फोट, धूल, प्रदूषण, दूषित पानी और जर्जर भवन जैसी समस्याओं से कोटोडी के ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं। सबसे बड़ी चिंता गांव के पुनर्वास को लेकर है, जो अब तक लंबित है। ग्रामीणों का सवाल साफ है—आखिर इस खतरे के बीच उन्हें और कितने दिन रहना पड़ेगा?

