नागपुर: नागपुर महानगरपालिका (NMC) की सार्वजनिक परिवहन सेवा ‘आपली बस’ की आर्थिक स्थिति लगातार दबाव में आती दिखाई दे रही है। वित्तीय वर्ष का बजट पेश करने के महज सात महीने बाद ही महानगरपालिका के परिवहन विभाग ने बस सेवा का संचालन सुचारु रखने के लिए प्रशासन से अतिरिक्त 108.51 करोड़ रुपये की मांग की है।
हैरानी की बात यह है कि परिवहन विभाग ने पहले ही 575.58 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद इतनी बड़ी अतिरिक्त राशि की मांग ने विभाग की वित्तीय योजना, राजस्व अनुमान और खर्चों के प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवहन समिति ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
परिवहन समिति की अध्यक्ष मंगला खेक्रे की अध्यक्षता में हुई बैठक में अतिरिक्त 108.51 करोड़ रुपये की मांग से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अब इस प्रस्ताव को आगे की मंजूरी के लिए स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा।
इसके साथ ही परिवहन विभाग ने अतिरिक्त राशि की व्यवस्था करने के लिए NMC के लेखा एवं वित्त विभाग से भी संपर्क किया है।
हालांकि, महानगरपालिका के एक वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी के अनुसार, पहले से मौजूद आर्थिक दायित्वों और सीमित बजटीय संसाधनों को देखते हुए इस समय 100 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि जुटाना आसान नहीं होगा।
575 करोड़ के बजट के बाद भी क्यों पड़ी अतिरिक्त रकम की जरूरत?
परिवहन विभाग ने अपने मूल बजट में लगभग 190 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया था, जबकि कुल खर्च 574.89 करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई गई थी।
इस खर्च को पूरा करने के लिए महानगरपालिका से 200 करोड़ रुपये की सब्सिडी मांगी गई थी। यह मांग पहले की तुलना में 50 करोड़ रुपये अधिक थी।
इसके बावजूद कुछ ही महीनों में विभाग को अतिरिक्त 108.51 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ गई। इससे विभाग के शुरुआती राजस्व अनुमानों और वास्तविक परिचालन खर्च के बीच बड़े अंतर का संकेत मिलता है।
अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक 295 करोड़ का खर्च
परिवहन समिति के सामने रखे गए प्रस्ताव के अनुसार, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच आपली बस सेवा के संचालन पर लगभग 295 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
विभाग ने इस अवधि के लिए अलग-अलग स्रोतों से 186.49 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- महानगरपालिका से मिलने वाली शेष अनुदान राशि।
- यात्रियों से प्राप्त होने वाला टिकट राजस्व।
- नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (NMRDA) से मिलने वाली सहायता।
- प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत मिलने वाली राशि।
इन सभी स्रोतों से अनुमानित आय और उपलब्ध राशि घटाने के बाद 108.51 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा सामने आया है। अब इस अंतर को पूरा करने की जिम्मेदारी महानगरपालिका पर डालने की मांग की गई है।
430 से बढ़कर 825 हुई बसों की संख्या
परिवहन विभाग ने बढ़ते खर्च के पीछे बसों के बेड़े में हुए विस्तार को प्रमुख कारण बताया है।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में आपली बस सेवा के बेड़े में 430 बसें थीं, जो अक्टूबर तक बढ़कर 825 हो गईं।
वर्तमान में नौ निजी ऑपरेटर शहर के आठ बस डिपो के माध्यम से परिवहन सेवाओं का संचालन कर रहे हैं। बसों की संख्या बढ़ने के साथ ही निजी ऑपरेटरों को किए जाने वाले भुगतान, रखरखाव और रोजाना के परिचालन खर्च में भी काफी वृद्धि हुई है।
हालांकि, बसों की संख्या बढ़ाने से पहले इसके वित्तीय प्रभावों और भविष्य में होने वाले खर्च का पर्याप्त आकलन किया गया था या नहीं, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बस शेल्टर के विज्ञापन और डिपो विकास के प्रस्ताव लौटाए
परिवहन समिति ने अतिरिक्त फंडिंग के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही कुछ अन्य प्रस्तावों में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- निजी अनुबंध पर संचालित बसों की संशोधित दरें।
- 242 बस शेल्टरों पर विज्ञापन अधिकार देने का प्रस्ताव।
- छह बस डिपो में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 13.84 करोड़ रुपये का खर्च।
समिति ने इन प्रस्तावों में आवश्यक बदलाव करने के बाद दोबारा पेश करने को कहा है। वहीं, एजेंडे के अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई।
वाठोडा से हिंगना तक पांच जगह बनेंगे CNG पंप
परिवहन समिति ने एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में महानगरपालिका की जमीन पर पांच सीएनजी फिलिंग स्टेशन स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।
ये स्टेशन निम्नलिखित स्थानों पर प्रस्तावित हैं:
- वाठोडा
- खापरी
- वाड़ी
- हिंगना
- महानगरपालिका वर्कशॉप परिसर
इनका निर्माण बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत किया जाएगा।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर समिति के सदस्यों ने कई सवाल उठाए। शहर में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या तेजी से बढ़ने के बीच अतिरिक्त सीएनजी पंपों की जरूरत और उनकी व्यावसायिक उपयोगिता पर सवाल खड़े किए गए।
इसके अलावा, महानगरपालिका की जमीन उपलब्ध कराने के बदले NMC को कितनी आय प्राप्त होगी, इसका स्पष्ट विवरण भी प्रस्ताव में नहीं दिया गया था।
विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के जरिए किसी विशेष व्यक्ति को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
बस किराये में 20 से 50 प्रतिशत तक छूट
एक तरफ परिवहन विभाग अतिरिक्त आर्थिक सहायता मांग रहा है, वहीं दूसरी ओर समिति ने विभिन्न संस्थाओं के लिए बस किराये में 20 से 50 प्रतिशत तक छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इस छूट का लाभ सरकारी और अर्धसरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और निजी संस्थाओं को मिलेगा।
श्रेणी और बस के प्रकार के अनुसार किराये में अधिकतम 4,000 रुपये तक की कमी हो सकती है।
पहले प्रस्तावित किराया:
| बस का प्रकार | पिकअप-ड्रॉप सेवा | पूरे दिन का किराया |
|---|---|---|
| मिनी/मिडी डीजल बस | ₹5,000 | ₹12,000 |
| मिडी इलेक्ट्रिक बस | ₹6,000 | ₹13,000 |
| स्टैंडर्ड इलेक्ट्रिक बस | ₹7,000 | ₹14,000 |
आर्थिक दबाव के बीच किराये में छूट देने के फैसले ने परिवहन विभाग की राजस्व नीति पर एक नई बहस छेड़ दी है।
NMC की वित्तीय योजना पर उठे गंभीर सवाल
आपली बस सेवा का विस्तार निश्चित रूप से शहर में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता बढ़ाने में मददगार हो सकता है, लेकिन इसके साथ बढ़ते आर्थिक बोझ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मूल बजट में अनुमानित खर्च और आय के बीच पहले से ही बड़ा अंतर था। इसके बावजूद अतिरिक्त बसें बढ़ाने और परिचालन खर्च की जिम्मेदारी लेने के बाद अब विभाग को फिर से करोड़ों रुपये की जरूरत पड़ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महानगरपालिका बिना किसी स्पष्ट और ठोस वित्तीय योजना के आपली बस सेवा पर लगातार अतिरिक्त सार्वजनिक धन खर्च करती रहेगी? साथ ही, क्या अतिरिक्त सब्सिडी मंजूर करने से पहले विभाग के राजस्व अनुमानों, खर्चों और आर्थिक प्रबंधन की समीक्षा की जाएगी?
फिलहाल 108.51 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग को लेकर अंतिम फैसला स्थायी समिति के स्तर पर होना बाकी है।

