नागपुर में 73.82 करोड़ का किसान लोन घोटाला बेनकाब! सरकारी मुआवजे का लालच देकर किसानों के दस्तावेज हड़पे, 3 और आरोपी गिरफ्तार

नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में गरीब किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी कृषि कर्ज लेने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में नागपुर ग्रामीण पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मौदा और रामटेक शाखाओं से कुल 73 करोड़ 82 लाख 92 हजार 850 रुपये का फर्जी कृषि कर्ज हासिल करने का आरोप है।

इस गिरोह ने कथित तौर पर सरकारी फसल नुकसान मुआवजे का लालच देकर गरीब और अशिक्षित किसानों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और जमीन के दस्तावेज हासिल किए। इसके बाद किसानों की जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर लाखों रुपये के कृषि ऋण लिए गए। इस कार्रवाई से पूरे महाराष्ट्र में हड़कंप मच गया है।

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तीन और आरोपी गिरफ्तार, बेंगलुरु और जबलपुर से दबोचे गए

आर्थिक अपराध शाखा ने जांच तेज करते हुए तीन आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  • डॉ. मदन गोपाल मल्लिकार्जुन पाटिल (26) – बेंगलुरु से गिरफ्तार।
  • प्रिय रंजन अशोक कुमार चौधरी (42) उर्फ गौरव मिश्रा और गौरव जायसवाल – जबलपुर से गिरफ्तार।
  • राहुल उर्फ संदीप सतीश दुबे (37) – जबलपुर से गिरफ्तार।

पुलिस के अनुसार, चौधरी मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर का निवासी है और कर्नाटक के हुबली में रह रहा था। वहीं, दुबे जबलपुर का रहने वाला है।

तीनों आरोपियों को 3 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। अलग-अलग राज्यों से हुई इन गिरफ्तारियों ने कथित घोटाले के अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है।

SBI की मौदा और रामटेक शाखाओं से 73.82 करोड़ का फर्जी कर्ज

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने SBI की दो शाखाओं से कथित तौर पर फर्जी कृषि ऋण हासिल किए।

  • मौदा शाखा: 54,69,42,850 रुपये।
  • रामटेक शाखा: 19,13,50,000 रुपये।
  • कुल रकम: 73,82,92,850 रुपये।
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जांच के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी कंपनियां बनाकर कर्ज की रकम उन कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई। इस तरह किसानों के नाम पर प्राप्त ऋण की रकम को कथित तौर पर दूसरी जगह भेज दिया गया।

10 हजार रुपये सरकारी मुआवजे का लालच देकर किसानों को फंसाया

इस पूरे घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू किसानों को जाल में फंसाने का तरीका है।

आरोपियों ने सावनेर और रामटेक तहसील के गरीब, अशिक्षित और कम पढ़े-लिखे किसानों से संपर्क किया। उन्हें कथित तौर पर भरोसा दिलाया गया कि फसल खराब होने पर सरकार की ओर से हर साल 10,000 रुपये का मुआवजा मिलेगा।

इस सहायता का लाभ दिलाने के नाम पर आरोपियों ने किसानों से बैंक खाते की जानकारी और जरूरी दस्तावेज मांगे।

आधार, पैन कार्ड और 7/12 के दस्तावेजों का किया दुरुपयोग

सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद में किसानों ने आरोपियों को अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंप दिए।

इनमें शामिल थे:

  • आधार कार्ड।
  • पैन कार्ड।
  • कृषि भूमि के मालिकाना हक के दस्तावेज।
  • जमीन के 7/12 उतारे।
  • बैंक खाते से संबंधित जानकारी।

आरोप है कि आरोपियों ने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किसानों की जानकारी और सहमति के बिना बड़े कृषि ऋण हासिल करने के लिए किया।

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अंग्रेजी में लिखे दस्तावेजों पर किसानों से करवाए हस्ताक्षर

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी किसानों को बैंक तक ले जाते थे और उनसे अंग्रेजी में लिखे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाते थे।

कई किसान अंग्रेजी पढ़ने और दस्तावेजों की कानूनी जानकारी समझने में सक्षम नहीं थे। इसी बात का कथित फायदा उठाकर उनके हस्ताक्षर का इस्तेमाल लाखों रुपये के कृषि ऋण हासिल करने के लिए किया गया।

किसानों को इसकी जानकारी तक नहीं थी कि उनके नाम पर इतना बड़ा कर्ज लिया जा रहा है।

फर्जी कंपनियां और गोदाम लाइसेंस बनाकर किया करोड़ों का खेल

पुलिस जांच में गिरोह द्वारा फर्जी कंपनियां बनाने और बैंक ऋण की रकम उन कंपनियों के खातों में भेजने की बात सामने आई है।

आरोपियों ने कथित तौर पर वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (WDRA), दिल्ली के फर्जी लाइसेंस और जाली इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रसीदों का इस्तेमाल किया।

इसके जरिए आरोपियों ने बैंक की प्रोड्यूस मार्केटिंग लोन स्कीम का दुरुपयोग कर भारी रकम के ऋण हासिल किए।

अब आर्थिक अपराध शाखा इन फर्जी कंपनियों, बैंक लेन-देन और दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि करोड़ों रुपये की रकम आखिर किन लोगों तक पहुंची।

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मामले में अब तक 18 लोगों के नाम, पहले भी हुई थी गिरफ्तारी

इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने इससे पहले सचिन कारेमोरे को गिरफ्तार किया था। अब तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।

मौदा और रामटेक पुलिस थानों में दर्ज मामलों में अब तक कुल 18 लोगों के नाम सामने आए हैं।

नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक डॉ. हर्ष पोद्दार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल म्हस्के के मार्गदर्शन में मामले की जांच की जा रही है।

कर्नाटक में भी इसी तरह के धोखाधड़ी मामलों की जांच

पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी प्रिय रंजन अशोक कुमार चौधरी के खिलाफ कर्नाटक में भी इसी तरह की धोखाधड़ी के मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।

इससे पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों में भी सक्रिय हो सकता है।

EOW खंगाल रही करोड़ों रुपये का मनी ट्रेल

आर्थिक अपराध शाखा अब इस पूरे घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही है।

  • बाकी फरार आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी।
  • फर्जी कंपनियों के बैंक खातों की जांच।
  • 73.82 करोड़ रुपये की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाना।
  • फर्जी वेयरहाउस लाइसेंस और इलेक्ट्रॉनिक रसीदें तैयार करने वालों की पहचान।
  • किसानों के नाम पर लिए गए ऋण के वास्तविक लाभार्थियों का पता लगाना।

10 हजार के मुआवजे का सपना दिखाकर किसानों के नाम पर 73 करोड़ का कर्ज!

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इस मामले ने कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया और ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिन किसानों को कथित तौर पर सालाना 10 हजार रुपये सरकारी सहायता मिलने का भरोसा दिया गया था, उन्हीं किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर करोड़ों रुपये का कर्ज हासिल किया गया।

73.82 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में अब पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक से निकाली गई रकम किन लोगों तक पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है।

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