दो एकड़ में अंजीर की खेती से 8 लाख रुपये की कमाई, अब खेत में ही फल प्रसंस्करण उद्योग लगाने की तैयारी

खापा: पारंपरिक खेती में आधुनिक तकनीक और नए प्रयोगों को शामिल कर विदर्भ के किसान भी बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं, यह साबित किया है कवडस, तहसील सावनेर के किसान सुनील ठाकरे ने। उन्होंने महज दो एकड़ में अंजीर की खेती कर सालाना करीब 7 से 8 लाख रुपये का उत्पादन हासिल किया है। अब वे खेत में ही फल प्रसंस्करण उद्योग शुरू कर अपने कृषि उत्पाद का मूल्य बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

दो एकड़ में ‘डायना’ किस्म के अंजीर की खेती

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सुनील ठाकरे ने करीब एक वर्ष पहले दो एकड़ क्षेत्र में ‘डायना’ किस्म के अंजीर लगाए। उन्होंने खेती में ड्रिप सिंचाई, बेड पद्धति और मल्चिंग का उपयोग किया। पौधों के बीच 10×8 फीट की दूरी रखते हुए व्यवस्थित तरीके से बाग तैयार किया गया है।

आधुनिक तकनीक से बेहतर उत्पादन

अंजीर के पौधों की अच्छी वृद्धि और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए ठाकरे ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में गांडूळ खाद, आवश्यकतानुसार फफूंदनाशकों का उपयोग, छंटाई और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। बेहतर प्रबंधन के कारण उन्हें संतोषजनक उत्पादन मिल रहा है।

खेत में ही फल प्रसंस्करण उद्योग लगाने का संकल्प

केवल कच्चे अंजीर बेचने के बजाय उससे अधिक मूल्य प्राप्त करने के उद्देश्य से सुनील ठाकरे ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग योजना के तहत वर्ष 2026-27 में अपने खेत में ही फल प्रसंस्करण उद्योग शुरू करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है।

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मॉल और होटल में उत्पाद बेचने की योजना

ठाकरे की योजना खेत में उत्पादित अंजीर को प्रसंस्कृत कर आकर्षक पैकेजिंग के साथ नागपुर के मॉल, होटल और थोक विक्रेताओं तक पहुंचाने की है। इससे कृषि उपज का मूल्यवर्धन होगा और अतिरिक्त आय का नया स्रोत तैयार होगा।

कृषि विभाग की टीम ने किया खेत का दौरा

निशिगंधा किसान उत्पादक कंपनी के सदस्य सुनील ठाकरे कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में खेती कर रहे हैं। उनके खेत का कृषि अधिकारियों की टीम ने दौरा कर खेती की जानकारी ली। टीम में तालुका कृषि अधिकारी सोमनाथ साठे, खापा मंडल कृषि अधिकारी विलास मिसे, उपकृषि अधिकारी रोशन डंबारे, सहायक कृषि अधिकारी मीनल वैद्य और पाटणसावंगी कृषि अधिकारी अनिल खरपुरे शामिल रहे।

विदर्भ के किसानों के लिए बना प्रेरणादायक प्रयोग

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सुनील ठाकरे का यह प्रयोग दिखाता है कि उचित नियोजन, आधुनिक तकनीक और कृषि उपज के प्रसंस्करण को अपनाकर विदर्भ में फलोत्पादन को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनका अंजीर उत्पादन क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।

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