नाबालिगों के हाथों में स्टेयरिंग, सड़क पर बढ़ रहा मौत का खतरा, ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

नागपुर में बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के नाबालिगों द्वारा दोपहिया और महंगी कारें चलाने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। पुणे के चर्चित पोर्शे हादसे से लेकर नागपुर के मर्सिडीज मामले तक कई गंभीर घटनाओं के बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है। ट्रैफिक पुलिस ने अब तक 199 नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों पर ऐसे चालकों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है।

  • Save

माता-पिता की लापरवाही बन रही हादसों की वजह

रिपोर्ट के अनुसार, कई अभिभावक सुविधा के नाम पर अपने नाबालिग बच्चों को बाइक और कार चलाने के लिए दे देते हैं, जबकि उन्हें वाहन चलाने का कानूनी अधिकार नहीं होता। यह लापरवाही अब आम लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।

पोर्शे हादसे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

मई 2024 में पुणे के कल्याणीनगर पोर्शे हादसे में 17 वर्षीय किशोर ने तेज रफ्तार कार से दो आईटी इंजीनियरों की जान ले ली थी। इसके बाद मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर समेत राज्य के कई शहरों में भी नाबालिगों की लापरवाही से जुड़े मामले सामने आए। हर घटना के बाद सख्त कार्रवाई की बातें हुईं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर पहले जैसे हो गए।

  • Save

दसवीं-बारहवीं के छात्र बड़ी संख्या में चला रहे वाहन

रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर के कोचिंग सेंटरों और स्कूलों में आने-जाने वाले दसवीं और बारहवीं के कई छात्र दोपहिया वाहन चलाकर पहुंचते हैं। अधिकांश मामलों में अभिभावक ही बच्चों को सुविधा के लिए वाहन उपलब्ध कराते हैं।

हालांकि ट्रैफिक पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन शहर में मौजूद हजारों नाबालिग चालकों की तुलना में यह कार्रवाई बेहद सीमित मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के आसपास नियमित जांच अभियान और अभिभावकों पर सख्त कार्रवाई ही इस समस्या का समाधान हो सकती है।

ट्रैफिक पुलिस ने दी सख्त चेतावनी

उप पुलिस आयुक्त (यातायात) आदित्य मिरखेळकर ने कहा कि नाबालिगों को वाहन देना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि दूसरों की जान जोखिम में डालने जैसा है। उन्होंने बताया कि ऐसे हर मामले में संबंधित अभिभावक या वाहन मालिक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के आसपास विशेष जांच अभियान को और तेज किया जाएगा तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

कानून क्या कहता है?

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 199A के अनुसार यदि 18 वर्ष से कम आयु का कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके अभिभावक या वाहन मालिक को जिम्मेदार माना जाता है।

ऐसे मामलों में:

  • Save
  • ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
  • संबंधित वाहन का पंजीकरण 12 महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।
  • नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता।

छह महीने में 47 नाबालिग चालकों पर कार्रवाई

नागपुर ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक 110 नाबालिग वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई थी, जबकि जनवरी से जून 2026 के बीच 47 और मामलों में कार्रवाई की गई। हालांकि जानकारों का कहना है कि यह केवल वास्तविक स्थिति का एक छोटा हिस्सा है। शहर के प्रमुख चौराहों, स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों के बाहर कुछ मिनट खड़े रहने पर भी बिना लाइसेंस वाहन चलाने वाले कई नाबालिग आसानी से दिखाई देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link