नागपुर: महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) द्वारा सीसीएमपी (Certificate Course in Modern Pharmacology) पूरा कर चुके BHMS डॉक्टरों को पंजीकरण देने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में नागपुर में बड़ा चिकित्सकीय आंदोलन शुरू हो गया है। गुरुवार से 650 निजी अस्पतालों के अनिश्चितकालीन बंद और मेयो व मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण नागपुर समेत पूरे विदर्भ की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका है।
BHMS डॉक्टरों के MMC पंजीकरण का विरोध
डॉक्टरों का कहना है कि अदालत का अंतिम फैसला आने तक CCMP कोर्स पूरा कर चुके BHMS डॉक्टरों को MMC में पंजीकरण देने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। इसी मांग को लेकर मार्ड (MARD) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने आंदोलन तेज कर दिया है।
ओपीडी सेवाएं प्रभावित, मरीजों की लंबी कतारें
रेजिडेंट डॉक्टरों ने सबसे पहले ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया, जिससे मेयो और मेडिकल अस्पतालों में मरीजों की जांच व्यवस्था प्रभावित हो गई। हालात संभालने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों को ओपीडी की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण जांच की रफ्तार काफी धीमी रही। अस्पतालों के बाहर घंटों तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं।
आज से 650 निजी अस्पताल रहेंगे बंद
IMA नागपुर के अध्यक्ष डॉ. सचिन गाठे के अनुसार, गुरुवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल में करीब 4 हजार डॉक्टर शामिल हो रहे हैं। इसके चलते नागपुर के लगभग 650 निजी अस्पतालों में नियमित चिकित्सा सेवाएं बंद रहेंगी। डॉक्टरों ने सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है।
मार्ड ने सरकार को दिया अंतिम ज्ञापन
सेंट्रल मार्ड के महासचिव डॉ. आशुतोष आडे ने बताया कि संगठन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अंतिम ज्ञापन सौंपा है। इसमें मांग की गई है कि अदालत के अंतिम निर्णय तक BHMS डॉक्टरों के MMC पंजीकरण पर रोक लगाई जाए।
रेजिडेंट डॉक्टरों की अन्य मांगें भी लंबित
मार्ड ने केवल MMC पंजीकरण का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती, स्टाइपेंड (विद्यावेतन) में वृद्धि, सुरक्षा, आवास और शैक्षणिक सुविधाओं जैसी लंबित मांगों को भी सरकार के सामने रखा है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका
डॉक्टर संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो ओपीडी के साथ-साथ आईपीडी, वार्ड और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इससे नागपुर ही नहीं, बल्कि पूरे विदर्भ से इलाज के लिए आने वाले हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

