घटना का विवरण
नागपुर के धंतोली क्षेत्र में अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने एक क्लिनिक पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना वैध अनुमति के एलोपैथिक दवाओं की बिक्री का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में लगभग 7 लाख रुपये मूल्य की दवाओं का स्टॉक जब्त किया गया है। यह मामला मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही और अवैध गतिविधियों को उजागर करता है।
छापेमारी की जानकारी
एफडीए को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। 3 जून को धंतोली गार्डन के पास स्थित ‘न्यू रूट्स स्किन, लेजर एंड हेयर ट्रांसप्लांट क्लिनिक’ पर छापा मारा गया। यह कार्रवाई आयुक्त तुकाराम मुंढे और सहआयुक्त (औषधि) मिलिंद काळेश्वरकर के मार्गदर्शन में की गई।
जांच के दौरान क्लिनिक में भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाओं का भंडार पाया गया, जबकि इसके लिए कोई वैध औषधि बिक्री लाइसेंस उपलब्ध नहीं था।
अनियमितताएँ उजागर
जांच के समय क्लिनिक के ऑपरेशन मैनेजर आकांक्षा बोंद्रे से दवाओं की खरीद से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
यह भी सामने आया कि क्लिनिक के पास दवा बिक्री का वैध लाइसेंस नहीं था, फिर भी मरीजों को दवाएं दी जा रही थीं और बिल नासिक स्थित एक लाइसेंसधारी संस्था ‘116 रेमेडीज’ के नाम पर जारी किए जा रहे थे। यह स्पष्ट रूप से कानूनी नियमों का उल्लंघन है।
जब्त दवाओं का विवरण
कार्रवाई के दौरान कुल 25 प्रकार की दवाएँ जब्त की गईं, जिनमें शामिल हैं:
- एंटीबायोटिक दवाएँ
- एंटीफंगल दवाएँ
- केटोकोनाज़ोल युक्त उत्पाद
- औषधीय शैम्पू
- पीपीआई दवाएँ
इसके अलावा चार दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत लगभग 7 लाख रुपये बताई गई है।
कानूनी कार्रवाई और जांच
प्रशासन ने प्रारंभिक जांच में इसे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 18 का उल्लंघन माना है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
प्रशासन की अपील
एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि वे दवाओं की गुणवत्ता, भ्रामक विज्ञापन या बिना अनुमति दवा बिक्री से संबंधित किसी भी शिकायत को तुरंत प्रशासन तक पहुंचाएँ, ताकि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

