घटना का विवरण
नागपुर जिले में वाळू (रेत) सहित अन्य गौण खनिजों के अवैध परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्रशासन द्वारा की गई जांच में कुल 261 मामले उजागर किए गए हैं, जिनमें से 5 मामलों में आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज किया गया है। इसके साथ ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों से लगभग 3 करोड़ 89 लाख 24 हजार 132 रुपये की वसूली भी की गई है।
कार्रवाई का पूरा ब्योरा
जिला खनिकर्म विभाग द्वारा यह कार्रवाई मार्च माह तक की गई है। जांच में सामने आया कि जिले के कई तहसीलों में अवैध रेत परिवहन सक्रिय था। इनमें सबसे अधिक मामले पारशिवनी (44 मामले) और मौदा (42 मामले) में दर्ज किए गए।
इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में दर्ज मामलों का विवरण इस प्रकार है: उमरेड (26), भिवापुर (25), सावनेर (23), कळमेश्वर (23), रामटेक (21), नागपुर शहर (15), कुही (13), कामठी (10), हिंगणा (8), नागपुर ग्रामीण (7), नरखेड़ (3) और काटोल (1)।
इन मामलों में से कळमेश्वर में 3 और भिवापुर में 2 मामलों में FIR दर्ज की गई है। विशेष रूप से यह भी सामने आया है कि किसी भी मामले में अब तक वाहन जब्त नहीं किए गए हैं, जो प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।
प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी प्रणाली
अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत तहसीलदार और उपविभागीय अधिकारी (SDO) की विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है। जिले में कुल 35 चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं, जहां राजस्व और पुलिस विभाग के कर्मचारी तैनात रहते हैं।
रेत घाटों पर प्रतिबंध और संभावित चुनौतियां
नागपुर जिले में कुल 39 रेत घाट संचालित हैं। सरकारी नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ष 10 जून से 30 सितंबर तक सभी रेत घाट बंद रहते हैं। इस अवधि में अवैध रेत उत्खनन और तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका रहती है, जिससे प्रशासन के लिए यह समय सबसे बड़ी चुनौतीपूर्ण परीक्षा माना जाता है।
निष्कर्ष
जिले में अवैध रेत परिवहन पर की गई यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है, लेकिन बड़ी संख्या में मामले सामने आना यह संकेत देता है कि अवैध खनन पर नियंत्रण अभी भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।

