जनकल्याण के लिए कठिन साइकिल यात्रा पर निकले सुमन क्षेत्री
दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। 28 वर्षीय सुमन क्षेत्री ने अपने संकल्प से इसे साबित कर दिखाया है। असम के तिनसुकिया निवासी सुमन क्षेत्री ने मानव समाज के सुख, समृद्धि और शांति की कामना के साथ चेन्नई से अयोध्या तक करीब 1,800 किलोमीटर की साइकिल यात्रा शुरू की है। वर्तमान में वे कामठी क्षेत्र में पहुंच चुके हैं।
सुरक्षा रक्षक की नौकरी छोड़कर यात्रा का लिया संकल्प
सुमन क्षेत्री मूल रूप से असम के तिनसुकिया के रहने वाले हैं। उन्होंने दसवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है। आजीविका के लिए वे चेन्नई में सुरक्षा रक्षक के रूप में कार्य करते थे। हालांकि, जनकल्याण और धार्मिक आस्था से प्रेरित होकर उन्होंने नौकरी छोड़कर अयोध्या तक साइकिल से जाने का संकल्प लिया।
10 सितंबर को चेन्नई से शुरू हुई यात्रा
सुमन क्षेत्री ने 10 सितंबर को सुबह 3 बजे चेन्नई से अपनी साइकिल यात्रा शुरू की। उनकी साइकिल पर ‘जय श्रीराम—चेन्नई से अयोध्या साइकिल यात्रा’ लिखा हुआ एक बोर्ड लगा है। साइकिल पर भगवा ध्वज भी लगाया गया है।
प्रतिदिन लगभग 100 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं
सुमन प्रतिदिन करीब 100 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करते हैं। शाम होने के बाद मार्ग में मंदिर मिलने पर वे वहीं विश्राम करते हैं। सुबह करीब 7 बजे दोबारा यात्रा शुरू कर देते हैं। रास्ते में ढाबों पर उपलब्ध भोजन करके वे अपनी यात्रा जारी रखते हैं।
पुरानी साइकिल से यात्रा, बार-बार पंक्चर की चुनौती
सुमन इस लंबी यात्रा के लिए पुरानी साइकिल का उपयोग कर रहे हैं। रास्ते में साइकिल का बार-बार पंक्चर होने के बावजूद वे स्वयं ही उसकी मरम्मत कर लेते हैं। अत्यधिक थकान होने पर कुछ दूरी तक साइकिल को पैदल खींचकर चलते हैं, लेकिन उन्होंने अपना सफर रोकने का निर्णय नहीं लिया है।
अयोध्या के बाद असम लौटने की भी योजना
सुमन का लक्ष्य अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन करना है। इसके बाद वे अयोध्या से अपने गृह राज्य असम तक भी साइकिल से ही लौटने का संकल्प लेकर निकले हैं।
दृढ़ संकल्प और आस्था का प्रेरणादायी उदाहरण
तेज धूप, व्यस्त राजमार्गों और यात्रा के दौरान आने वाली तकनीकी परेशानियों के बावजूद सुमन क्षेत्री लगातार आगे बढ़ रहे हैं। दृढ़ संकल्प, आस्था और जनकल्याण की भावना के साथ शुरू की गई उनकी यह साइकिल यात्रा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बनी हुई है।

