नागपुर: नागपुर में कोल्ड स्टोरेज मशीनरी लगाने का झांसा देकर दाल मिल मालिक से 75 लाख 76 हजार 222 रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि तीन लोगों ने मिल में कोल्ड स्टोरेज सुविधा स्थापित करने का आश्वासन देकर अलग-अलग किस्तों में लाखों रुपये वसूल किए, लेकिन न तो मशीनरी उपलब्ध कराई और न ही अपना वादा पूरा किया। इस मामले में लकड़गंज पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लक्ष्मी दाल मिल के मालिक को बनाया निशाना
शिकायतकर्ता अमितकांत अनुपजी मोटवानी (41) सूर्यनगर निवासी हैं। उनकी दाल मिल गंगाबाई घाट के सामने स्थित है, जो लकड़गंज पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
कोल्ड स्टोरेज लगाने का दिया था प्रस्ताव
शिकायत के अनुसार, नरेंद्र मारोती काशिववार (49) ने अमितकांत मोटवानी से संपर्क किया। उसने बताया कि सोमलवाड़ा, नागपुर स्थित उसकी कंपनी के.एन. रेफ्रिजरेशन प्राइवेट लिमिटेड कोल्ड स्टोरेज परियोजनाओं का काम करती है।
इसके बाद नरेंद्र ने मोटवानी की दाल मिल में कोल्ड स्टोरेज सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। मोटवानी द्वारा कोटेशन मांगे जाने पर आरोपी ने उन्हें कोटेशन दिया, जिस पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर भी किए।
21 लाख रुपये एडवांस लेने के बाद शुरू हुआ किस्तों में वसूली का सिलसिला
आरोप है कि 13 अप्रैल 2023 को नरेंद्र काशिववार ने कोल्ड स्टोरेज मशीनरी का ऑर्डर देने के नाम पर मोटवानी से 21 लाख रुपये एडवांस के रूप में प्राप्त किए।
इसके बाद नरेंद्र काशिववार, उसकी पत्नी उज्ज्वला नरेंद्र काशिववार (41) और उनके कथित कारोबारी साझेदार राहुल पुरुषोत्तम ठाकरे (41) ने मशीनरी की आपूर्ति और स्थापना का भरोसा देकर अलग-अलग किस्तों में कुल 75,76,222 रुपये वसूल किए।
पैसे लेने के बाद भी नहीं लगाई मशीनरी
शिकायतकर्ता के अनुसार, तीनों आरोपियों ने पूरी रकम प्राप्त करने के बावजूद कोल्ड स्टोरेज मशीनरी उपलब्ध नहीं कराई। वे लगातार काम पूरा करने का आश्वासन देते रहे, लेकिन वादा पूरा नहीं किया।
इससे दाल मिल मालिक को 75.76 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। आखिरकार उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
तीनों आरोपियों के खिलाफ BNS के तहत मामला दर्ज
मामले की जांच के बाद लकड़गंज पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान लेन-देन, कोटेशन और मशीनरी की आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी।

