86.90 करोड़ से बढ़कर 129.05 करोड़ रुपये हुआ तैयारियों का बजट
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार एक ओर सरकारी खर्च में कटौती के फैसले ले रही है, वहीं दूसरी ओर नागपुर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन की तैयारियों पर खर्च बढ़ने का मामला सामने आया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने अधिवेशन की तैयारियों के लिए 42.15 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्यों को मंजूरी दी है। इसके बाद तैयारियों पर होने वाला कुल खर्च 86.90 करोड़ रुपये से बढ़कर 129.05 करोड़ रुपये हो गया है।
सूखे की पृष्ठभूमि में सरकारी खर्च घटाने के फैसलों के बीच बजट में हुई इस बढ़ोतरी ने सरकार की मितव्ययिता नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
PWD ने अतिरिक्त कार्यों को दी मंजूरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक निर्माण विभाग ने अगस्त में शीतकालीन अधिवेशन की तैयारियों से संबंधित रिपोर्ट जारी की थी। शुरुआत में विभिन्न उपविभागीय कार्यालयों से प्रस्ताव मंगवाकर 145.13 करोड़ रुपये का प्रारंभिक खाका तैयार किया गया था।
बाद में तैयारियों पर खर्च घटाने की बात सामने आई। हालांकि, गुरुवार रात अचानक 42.15 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्यों को मंजूरी दिए जाने से कुल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हो गई।
सूखे के बीच सरकार ने खर्च में कटौती के लिए उठाए कई कदम
राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए सरकार ने सरकारी खर्च और जल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कई निर्णय लिए हैं। इनमें प्रमुख कदम शामिल हैं:
सरकारी खर्च में 20 प्रतिशत कटौती
राज्य सरकार ने सरकारी खर्च में 20 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य आर्थिक संसाधनों का सीमित और आवश्यक कार्यों के लिए उपयोग करना बताया गया है।
अधिकारियों और कर्मचारियों से एक दिन का वेतन देने की अपील
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री सहायता निधि में जमा करने का आह्वान किया गया है। इस संबंध में 16 अक्टूबर को शासन निर्णय जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
पानी के उपयोग में 10 प्रतिशत कमी के निर्देश
महानगरपालिकाओं से लेकर ग्राम पंचायतों तक को पानी के उपयोग में 10 प्रतिशत की कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
बड़े बांधों में 10 प्रतिशत पानी आरक्षित रखने का निर्देश
आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए बड़े बांधों में 10 प्रतिशत पानी आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में संभावित जल संकट के दौरान पानी की उपलब्धता बनाए रखना है।
नागपुर समेत कई जिलों में बोरवेल पर प्रतिबंध
नागपुर सहित कई जिलों में नए बोरवेल खोदने और पुराने बोरवेल को अधिक गहरा करने पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इन उपायों का उद्देश्य भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकना है।
खर्च में कटौती के दावों पर उठे सवाल
एक ओर सरकार सूखे के मद्देनजर खर्च और पानी के उपयोग में कटौती की नीति अपना रही है, वहीं शीतकालीन अधिवेशन की तैयारियों के बजट में 42.15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि चर्चा का विषय बन गई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्य सरकार विभिन्न विभागों को खर्च सीमित रखने के निर्देश दे रही है, तो अधिवेशन की तैयारियों में अतिरिक्त राशि मंजूर करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। अतिरिक्त कार्यों की प्रकृति, उनकी अनिवार्यता और बढ़े हुए बजट के औचित्य को लेकर विभागीय स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा।

