नागपुर जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दौरान करीब 14 लाख 44 हजार 15 मतदाताओं के गणना प्रपत्र जमा नहीं हुए हैं। इनमें से 5 लाख 46 हजार 149 मतदाता गृहभेंट के बाद भी नहीं मिले या अनुपस्थित पाए गए, जबकि 5 लाख 30 हजार मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। ऐसे में करीब 10 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा पैदा हो गया है।
बीएलओ मतदाताओं के घर तक पहुंचे या नहीं?
SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर गणना प्रपत्र देना और भरवाना था। हालांकि, उत्तर नागपुर, मानकापुर, जाफरनगर, सादिकाबाद कॉलोनी और जय हिंदनगर सहित कई इलाकों से BLO के घर नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ नागरिकों ने यह भी बताया कि उन्हें BLO से संपर्क करने या उनसे मिलने की जगह की जानकारी नहीं थी।
मोबाइल नंबर नहीं होने से संपर्क में आई दिक्कत
SIR के दौरान मतदाताओं से संपर्क के लिए मोबाइल नंबर महत्वपूर्ण है। लेकिन कई मतदाताओं के रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर दर्ज नहीं था या पुराने और गलत नंबर दर्ज थे। नागपुर में BLO को कॉल बुक करने के लिए 35 हजार से अधिक अनुरोध प्राप्त हुए, जिनमें से करीब 30 हजार अनुरोधों पर कार्रवाई की गई।
शहर में पलायन और बंद घर बनी बड़ी चुनौती
नागपुर शहर में किराए के मकानों में रहने वाले लोगों का बार-बार स्थानांतरण, अपार्टमेंट में बंद घर और बदले हुए पते के कारण मतदाताओं को खोजने में दिक्कत आई। BLO के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘संपर्क नहीं हुआ’ श्रेणी में दर्ज किया गया। इसके विपरीत SIR मैपिंग में ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्र की तुलना में आगे रहा।
घरभेंट के बजाय सुविधा केंद्रों पर बुलाए गए मतदाता
SIR के अंतिम चरण में कई BLO ने मतदान केंद्र, स्कूल, समाज भवन और सुविधा केंद्रों से काम किया। नागरिकों से वहीं पहुंचकर प्रपत्र जमा करने को कहा गया। यह व्यवस्था प्रशासन के लिए वैकल्पिक उपाय हो सकती है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, प्रवासियों और तकनीकी प्रक्रिया से अनजान मतदाताओं के लिए यह परेशानी का कारण बनी।
2002 की मतदाता सूची की गलतियां भी बनीं परेशानी
SIR मैपिंग के लिए 2002 की मतदाता सूची की पुरानी प्रविष्टियों को खोजना कई मतदाताओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। नाम, EPIC नंबर और रिश्तेदारों के नाम में गलतियां या अधूरी जानकारी मिलने की शिकायतें सामने आईं। कुछ मामलों में महिलाओं की वर्तमान जानकारी को पुरानी मतदाता सूची से जोड़ने में भी परेशानी हुई।
10 लाख नाम हटने की आशंका, जिम्मेदारी किसकी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मतदाताओं को ‘नहीं मिले’ या ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ बताया गया है, क्या वास्तव में वे अपने पते पर मौजूद नहीं थे या कई मामलों में BLO की गृहभेंट ही नहीं हो पाई? यदि पात्र मतदाताओं के नाम केवल संपर्क या दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई कमी के कारण प्रभावित होते हैं, तो यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

