नागपुर: विदर्भ टैक्सपेयर्स एसोसिएशन (VTA) की कार्यकारिणी बैठक में महाराष्ट्र में बिजली की बढ़ती लागत को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। VTA अध्यक्ष श्रावण कुमार मालू की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपभोक्ताओं, करदाताओं और कारोबारियों पर पड़ रहे बिजली खर्च के बढ़ते बोझ की व्यापक समीक्षा की मांग की गई।
बिजली की बढ़ती लागत का असर आम उपभोक्ता पर
VTA ने कहा कि बिजली एक आवश्यक सेवा होने के साथ-साथ घरों, अस्पतालों, MSME, उद्योगों, कृषि, शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट है। बिजली की प्रभावी लागत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ता है, जिसका अंतिम बोझ आम उपभोक्ता पर आता है।
पूरे बिजली टैरिफ ढांचे की समीक्षा की मांग
VTA ने महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) के समक्ष बिजली टैरिफ की व्यापक समीक्षा का मुद्दा उठाने का निर्णय लिया है। संगठन के अनुसार समीक्षा केवल प्रति यूनिट बिजली दर तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बिजली की पूरी प्रभावी लागत को इसमें शामिल किया जाना चाहिए।
इसमें फिक्स्ड चार्ज, डिमांड चार्ज, FAC, ToD चार्ज, व्हीलिंग चार्ज, बिजली शुल्क और अन्य संबंधित शुल्कों की भी समीक्षा की मांग की गई है।
डिमांड और फिक्स्ड चार्ज को तर्कसंगत बनाने पर जोर
VTA ने डिमांड और फिक्स्ड चार्ज को तर्कसंगत बनाने तथा टाइम-ऑफ-डे (ToD) टैरिफ के समय की वास्तविक बिजली खपत के पैटर्न के आधार पर समीक्षा करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि बिजली शुल्क की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो रूफटॉप और कैप्टिव सौर ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा दे, न कि उसे हतोत्साहित करे।
अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी हो बिजली दरें
VTA ने कहा कि महाराष्ट्र की बिजली दरें अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी रहनी चाहिए। बिजली की लागत का सीधा संबंध निवेश, रोजगार और राज्य के कारोबार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से है।
किसी एक क्षेत्र के लिए विशेष दर की मांग नहीं
VTA अध्यक्ष श्रावण कुमार मालू ने कहा कि संगठन किसी विशेष क्षेत्र के लिए रियायती या विशेष बिजली दर की मांग नहीं कर रहा है। उनकी मांग एक निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर निर्धारित बिजली शुल्क व्यवस्था की है, जिसमें बिजली वितरण व्यवस्था की आवश्यकताओं के साथ उपभोक्ताओं और करदाताओं के हितों का भी संतुलन हो।
उद्योग और रोजगार नीतियों के अनुरूप हो बिजली नीति
VTA सचिव तेजिंदर सिंह रेनू ने कहा कि उद्योग, MSME, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों में बिजली टैरिफ नीति भी सामंजस्यपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतिथ्य क्षेत्र केवल एक उदाहरण है, जबकि बिजली की लागत का प्रभाव कई रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों पर पड़ता है।
मुख्यमंत्री और MERC को सौंपा जाएगा ज्ञापन
बैठक में VTA कार्यकारिणी ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा विभाग और MERC को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। इसमें बिजली टैरिफ की व्यापक समीक्षा और किसी बड़े बदलाव से पहले विभिन्न हितधारकों से अधिक व्यापक विचार-विमर्श की मांग की जाएगी।
VTA ने कहा कि सस्ती, अनुमानित और तर्कसंगत बिजली दरें केवल कारोबार के लिए ही नहीं, बल्कि बढ़ती लागत के अप्रत्यक्ष प्रभाव से आम उपभोक्ताओं को बचाने के लिए भी आवश्यक हैं।
बैठक में ये पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद
बैठक में उपाध्यक्ष हेमंत त्रिवेदी और अश्विन अग्रवाल (मेहाड़िया), कोषाध्यक्ष पवन के. चोपड़ा, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह चावला और सीए हेमंत सरडा, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कानूंगो तथा कार्यकारिणी सदस्य प्रवीण अग्रवाल, साकिब पारेख, गोविंद पटेल, वीरू बालानी, शरद सोनकुले, हेमंत शर्मा, प्रतीक गुजराथी, नरेंद्रपाल सिंह (विक्की) ओसन और संजीव पुथरान उपस्थित रहे।

