नागपुर: नागपुर जिले के पाटणसावंगी स्थित भूमिगत कोयला खदान में एक मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने से हड़कंप मच गया है। शुरुआत में आशंका जताई गई थी कि मजदूर की मौत कन्वेयर बेल्ट में फंसने के कारण हुई। हालांकि, मृतक के शरीर पर कन्वेयर बेल्ट में फंसने से होने वाली चोटों के स्पष्ट निशान नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं, खदान के अंदर ऑक्सीजन का स्तर भी सामान्य बताया जा रहा है। ऐसे में 36 वर्षीय जगदीश आसुटकर की मौत आखिर किस वजह से हुई? यह सवाल अब गंभीर हो गया है।
खदान के अंदर करीब 200 मीटर दूरी पर मिला शव
मृतक की पहचान जगदीश आसुटकर (36 वर्ष) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से चंद्रपुर जिले के वरोरा तालुका स्थित चारूरखटी गांव के निवासी थे।
जगदीश पिछले तीन वर्षों से पाटणसावंगी की कोयला खदान में काम कर रहे थे। वह खदान परिसर की कर्मचारी आवासीय कॉलोनी में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ रहते थे।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे खदान के अंदर लगभग 200 मीटर की दूरी पर उनका शव मिला। इसके बाद उन्हें बाहर निकालकर वलनी स्थित वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कन्वेयर बेल्ट में फंसने का दावा, लेकिन शरीर पर चोट के निशान नहीं
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआत में जगदीश की मौत कन्वेयर बेल्ट में फंसने से होने की आशंका जताई गई थी। लेकिन उनके शरीर पर बेल्ट में फंसने से होने वाली स्पष्ट चोटों के निशान नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा खदान के अंदर ऑक्सीजन का स्तर भी सामान्य बताया गया है। इन परिस्थितियों के कारण मौत की शुरुआती वजह को लेकर संदेह गहरा गया है।
परिजनों ने शव स्वीकारने से किया इनकार
जगदीश की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। मृतक के परिजनों ने मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट करने की मांग की।
बताया गया है कि परिजनों ने कुछ समय तक अस्पताल में शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए नागपुर भेजा गया।
सावनेर पुलिस ने किया पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना की जानकारी मिलने के बाद सावनेर पुलिस स्टेशन के सहायक पुलिस निरीक्षक दत्ता कानगुले ने घटनास्थल का दौरा किया और पंचनामा किया।
फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही जगदीश आसुटकर की मौत के वास्तविक कारणों का पता चलने की संभावना है।
CITU संगठन और खदान प्रबंधन की भूमिका पर नजर
इस मामले में CITU संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही खदान प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे थे या नहीं? खदान में सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं? और क्या जगदीश वास्तव में कन्वेयर बेल्ट में फंसे थे? ऐसे कई सवाल अब सामने आ रहे हैं।
खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
पाटणसावंगी कोयला खदान में हुई इस घटना ने भूमिगत खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
36 वर्षीय जगदीश आसुटकर की संदिग्ध मौत का रहस्य अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल परिवार को न्याय और मौत की वास्तविक वजह का इंतजार है।

