सूखे से प्रभावित फसलों के पंचनामे शुरू
खापा: राज्य सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने सूखे के कारण फसलों को हुए नुकसान का पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सावनेर तहसील के खापा क्षेत्र में इसकी शुरुआत कोदेगांव शिवार से की गई। हालांकि, संयुक्त रूप से पंचनामा करने के सरकारी निर्देश के बावजूद पंचायत विभाग के कर्मचारी खेतों में नजर नहीं आ रहे हैं।
सावनेर भी सूखा प्रभावित तहसीलों में शामिल
राज्य सरकार ने प्रदेश की 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया है, जिसमें सावनेर तहसील भी शामिल है। इसके बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित फसलों का मौके पर जाकर सर्वे और पंचनामा किया जा रहा है, ताकि किसानों को नुकसान के आधार पर सरकारी सहायता मिल सके।
कृषि अधिकारियों ने खेत में पहुंचकर किया निरीक्षण
शनिवार, 3 अक्टूबर को सावनेर के उपविभागीय कृषि अधिकारी कल्याणकुमार डहाट ने कोदेगांव क्षेत्र में किसान नेमराज हाकांदे के खेत में पहुंचकर नुकसानग्रस्त फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। उनके मार्गदर्शन में तालुका कृषि अधिकारी सोमनाथ साठे, सहायक कृषि अधिकारी सिद्धार्थ गवई, प्रज्वल मेंढे और प्रवीण थोटे ने फसलों का पंचनामा तैयार किया।
कई किसान मौके पर रहे मौजूद
फसल नुकसान के निरीक्षण के दौरान किसान नेमराज हाकांदे, महेंद्र वायकूर सहित क्षेत्र के अन्य किसान भी मौजूद रहे। किसानों ने अपनी फसलों को हुए नुकसान की स्थिति अधिकारियों के सामने रखी।
वस्तुनिष्ठ पंचनामे करने के निर्देश
उपविभागीय कृषि अधिकारी कल्याणकुमार डहाट ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को फसलों के नुकसान का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर वस्तुनिष्ठ पंचनामा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पंचनामे की पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय में तत्काल पूरी की जानी चाहिए।
कोई भी प्रभावित किसान सहायता से वंचित न रहे
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि नुकसानग्रस्त कोई भी किसान सरकारी सहायता से वंचित न रहे। प्रशासन की ओर से फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कर समय पर पंचनामा पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
संयुक्त पंचनामा में पंचायत विभाग की भूमिका पर सवाल
सरकार के निर्देशानुसार फसल नुकसान के पंचनामे राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से किए जाने हैं। ऐसे में खापा क्षेत्र में चल रही प्रक्रिया के दौरान पंचायत विभाग के कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

