नागपुर खंडपीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराज़गी
मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कहा है कि कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मियों द्वारा यदि कानून की ही अनदेखी की जाती है, तो उन्हें कड़ी सजा मिलना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इससे समाज में पुलिस और न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत होगा।
70 वर्षीय बुजुर्ग को मिली 25 हजार रुपये की भरपाई
इस मामले में अवैध रूप से गिरफ्तार किए गए गांधीनगर निवासी सतीश डवले (70) को अदालत ने 25 हजार रुपये की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया है। राज्य सरकार को यह राशि 26 जून तक अदा करनी होगी।
अंबाझरी पुलिस पर गंभीर आरोप
सतीश डवले के खिलाफ उनकी बहू की शिकायत पर अंबाझरी पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। आरोप है कि पुलिस उपनिरीक्षक एस. जे. केंद्रे ने गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
अदालत के अनुसार पुलिस ने —
- गिरफ्तारी के लिखित कारण नहीं बताए
- परिजनों को सूचना नहीं दी
- गिरफ्तारी पंचनामा तैयार नहीं किया
- सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया
जिसे गंभीर लापरवाही माना गया।
‘सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय’ के सम्मान की बात
हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस के ब्रीदवाक्य ‘सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस को अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी का सम्मान करना चाहिए। कानून लागू करने वालों की जिम्मेदारी केवल आरोपी तक सीमित नहीं होती, बल्कि पूरे समाज और राज्य के प्रति होती है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फलके और निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग बेहद गंभीर मामला है। पुलिस के गलत व्यवहार से आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
विभागीय जांच के बाद भी अदालत की फटकार
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पुलिस उपनिरीक्षक केंद्रे के खिलाफ विभागीय जांच कर कार्रवाई की थी। इसके बावजूद अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया।

