नागपुर में चार महीने में सात शिशुओं की मौत; दूध और भोजन श्वासनली में जाने से हुआ एस्पिरेशन
नागपुर में दूध या भोजन श्वासनली में चले जाने से होने वाले ‘एस्पिरेशन’ और उसके बाद निमोनिया के कारण पिछले चार महीनों में सात मासूमों की मौत का मामला सामने आया है। मां की गोद में सुरक्षित समझे जाने वाले इन बच्चों की कुछ ही क्षणों में सांस थम गई और सात परिवारों को अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ा।
क्या है एस्पिरेशन?
जब बच्चे को पिलाया गया दूध या खिलाया गया भोजन भोजननली में जाने के बजाय श्वासनली में चला जाता है, तो इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में ‘एस्पिरेशन’ कहा जाता है। इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है और कई मामलों में एस्पिरेशन निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
मई में चार, जून-जुलाई में एक-एक मौत
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नागपुर में पिछले चार महीनों में एस्पिरेशन से संबंधित सात शिशुओं की मौत हुई है।
- मई: 4 मामले — एस्पिरेशन निमोनिया
- जून: 1 मामला — एस्पिरेशन निमोनिया
- जुलाई: 1 मामला — एस्पिरेशन निमोनिया
- अगस्त: 1 मामला — मिल्क एस्पिरेशन
गलत तरीके से दूध पिलाना बन सकता है जानलेवा
मनपा की माता एवं बाल संगोपन अधिकारी डॉ. सरला लाड के अनुसार, गलत तरीके से दूध पिलाने के कारण मासूमों की जान जाना बेहद पीड़ादायक है। यदि दूध पिलाते समय बच्चे को ठसका लगे या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
बच्चे को लिटाकर दूध न पिलाएं
बच्चा रो रहा हो या जल्दी सुलाने के लिए उसे सीधा लिटाकर स्तनपान या बोतल से दूध न पिलाएं। दूध पिलाते समय बच्चे का सिर शरीर की तुलना में थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए। विशेष रूप से रात के समय माता-पिता को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
दूध पिलाने के बाद डकार जरूर दिलाएं
दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे से लगाकर उसकी पीठ पर हल्के हाथ से थपथपाएं या सहलाएं। डकार आने के बाद ही बच्चे को बिस्तर पर सुलाना चाहिए। प्रसव के बाद मां थकी हुई हो सकती है, ऐसे में पिता या परिवार के अन्य सदस्य भी बच्चे की देखभाल में विशेष सतर्कता बरतें।
सोते या जोर-जोर से रोते बच्चे को दूध न दें
बच्चा गहरी नींद में हो या जोर-जोर से रो रहा हो, तो उसके मुंह में दूध डालने से बचें। ऐसी स्थिति में दूध के श्वासनली में जाने का खतरा बढ़ सकता है।
ठसका लगने या चेहरा नीला पड़ने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें
दूध पीते समय यदि बच्चे को ठसका लगे, चेहरा नीला पड़ने लगे या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे सामान्य न समझें। ऐसी स्थिति में समय गंवाए बिना तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
मां की ममता के साथ जागरूकता भी जरूरी
बच्चे को दूध पिलाते समय थोड़ी सी सावधानी गंभीर हादसे को टाल सकती है। खासकर रात के समय माता-पिता को बच्चे की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। सही तरीके से दूध पिलाना और खतरे के संकेतों को समय रहते पहचानना मासूम की जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

