नागपुर शहर में सीवेज और मलवाहिनी के सैकड़ों खुले चेंबर अब भी नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सोमवार को महानगरपालिका की कड़ी शब्दों में खिंचाई की।
हाईकोर्ट ने मनपा से पूछा—इतनी असंवेदनशीलता क्यों?
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि खुले चेंबर नागरिकों की जान के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसके बावजूद मनपा द्वारा न्यायालय के निर्देशों का गंभीरता और संवेदनशीलता से पालन नहीं किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण पेश करने का आदेश दिया है।
शहर में लाखों चेंबर, खुले चेंबर से दुर्घटना का खतरा
याचिकाकर्ता आशा भगत की ओर से दायर जनहित याचिका में बताया गया कि नागपुर में मलवाहिनी के 1,53,633 और सीवेज लाइन के 95,571 चेंबर हैं।
आरोप है कि इनमें से कई चेंबर के ढक्कन खराब गुणवत्ता के होने के कारण मामूली वजन पड़ने पर भी टूट जाते हैं और चेंबर खुले रह जाते हैं।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
बारिश के मौसम में पानी जमा होने के कारण खुले चेंबर दिखाई नहीं देते। इससे नागरिकों और जानवरों के जानलेवा हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि खुले चेंबर के कारण हर वर्ष कई लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं, कुछ को स्थायी अपंगता का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ मामलों में लोगों की मौत तक हो जाती है।
हादसा पीड़ितों के लिए मुआवजा नीति की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से खुले चेंबर के कारण होने वाले हादसों के पीड़ितों के लिए निश्चित मुआवजा नीति बनाने की मांग भी की है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पा गिरटकर ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। अब मनपा के जवाब के बाद हाईकोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा।

