रेलवे अधिकारी ने मांगी थी 1.07 लाख रुपये की रिश्वत
नागपुर में भ्रष्टाचार के दो अलग-अलग मामलों में CBI की विशेष अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। यह कार्रवाई CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) की जांच के बाद हुई।
पहले मामले में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक अजय कुमार को रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का दोषी पाया गया। उन्होंने खरीद आदेश की कुल राशि का 5 प्रतिशत यानी 1 लाख 7 हजार रुपये रिश्वत के रूप में मांगे थे।
रिश्वत की पहली किस्त लेते रंगेहाथ पकड़े गए
अजय कुमार को अगस्त 2016 में रिश्वत की पहली किस्त स्वीकार करते समय CBI की टीम ने रंगेहाथ पकड़ा था। अदालत ने उन्हें मामले के तहत तीन और चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उन पर कुल 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
WCL के काम में भी सामने आया भ्रष्टाचार
दूसरे मामले में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में संजय भिवगड़े और धनंजय रामलखन सिंह को दोषी ठहराया गया।
जांच में सामने आया कि निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता का बोरवेल कार्य किए जाने के बावजूद उसे नियमों के अनुसार पूर्ण दिखाया गया और उसका भुगतान कर दिया गया।
WCL को 4.10 लाख रुपये का नुकसान
इस अनियमितता के कारण WCL को 4 लाख 10 हजार 250 रुपये का आर्थिक नुकसान होने की बात जांच में सामने आई। अदालत ने दोनों दोषियों को विभिन्न धाराओं के तहत प्रत्येक को पांच वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI की कार्रवाई
दोनों मामलों में CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा की गई जांच के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया। फैसले से भ्रष्टाचार और सरकारी कार्यों में अनियमितता के खिलाफ कड़ा संदेश गया है।

