दूषित पानी की समस्या रोकने के लिए बनेगी विशेष समिति
नागपुर: शहर में कहीं भी दूषित पानी की आपूर्ति न हो, इसके लिए मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने विशेष समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने महानगरपालिका, ओसीडब्ल्यू कंपनी और न्यायालय मित्र अधिवक्ता इशिका महादुले को आगामी 12 अक्टूबर तक विशेषज्ञों के नाम प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई
इस मामले में उच्च न्यायालय ने स्वयं संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। सोमवार को इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान शहर में दूषित पानी की समस्या को गंभीरता से लिया गया।
शहर के कई क्षेत्रों में दूषित पानी की शिकायत
न्यायालय के समक्ष बताया गया कि शहर के 10 में से 9 जोन के विभिन्न इलाकों में दूषित पानी की आपूर्ति की समस्या सामने आई है। फरवरी 2026 में तत्कालीन महापौर नीता ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस समस्या पर चर्चा की गई थी।
कई बस्तियां दूषित जलापूर्ति से प्रभावित
दूषित पानी की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों में अजनी, समर्थनगर, पांढराबोडी, पंचशीलनगर, वसंतनगर, गुरुदेवनगर, कवेलू क्वार्टर, सीरसपेठ, जलालपुरा, दाभा, नेहरूनगर, नंदनवन, ताजबाग, गणेशपेठ, लोढ़ीपुरा, सतरंजीपुरा, इतवारी रेलवे स्टेशन क्षेत्र, प्रेमनगर, भानखेड़ा, भांडेवाड़ी झोपड़पट्टी, पारडी, एचबी टाउन, पवननगर, हुडको कॉलोनी, नारा, बोरगांव और निखारे लेआउट सहित कई इलाके शामिल हैं।
करीब चार लाख लोगों के स्वास्थ्य पर चिंता
इन क्षेत्रों में दूषित पानी की समस्या के कारण करीब चार लाख निवासियों के स्वास्थ्य पर खतरा होने की बात सामने आई है। दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए जलापूर्ति व्यवस्था की तकनीकी जांच और दूषित जलस्रोतों की पहचान आवश्यक मानी जा रही है।
शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना मनपा की जिम्मेदारी
उच्च न्यायालय ने कहा कि नागरिकों को पीने योग्य और शुद्ध पानी उपलब्ध कराना महानगरपालिका की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। इसलिए दूषित पानी के स्रोतों की पहचान कर उन्हें तत्काल समाप्त करना आवश्यक है।
विशेषज्ञों की मदद से समस्या का स्थायी समाधान
विशेष समिति के गठन के बाद विशेषज्ञों की मदद से शहर में दूषित पानी की आपूर्ति के कारणों का अध्ययन किए जाने की उम्मीद है। समिति की सिफारिशों के आधार पर जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार और दूषित जलस्रोतों को खत्म करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

