नाशिक: महाराष्ट्र के नाशिक स्थित TCS यूनिट में कथित धर्मांतरण, मानसिक प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न मामले की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) अब आरोपियों के मोबाइल और डिजिटल डिवाइसेस से डिलीट किया गया डेटा रिकवर करने में जुटी हुई है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आने का दावा किया जा रहा है।
डिलीट डेटा और डिजिटल सबूत खंगाल रही SIT
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट्स, वीडियो और सोशल मीडिया डेटा की डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है। SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कर्मचारियों पर किसी संगठित तरीके से धार्मिक दबाव बनाया गया था।
‘शीर खुर्मा’ और धार्मिक प्रतीकों को लेकर आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ पीड़ित कर्मचारियों को कथित तौर पर धार्मिक प्रतीक पहनने के लिए मजबूर किया गया और उनके वीडियो बनाकर व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किए गए। कुछ शिकायतों में कथित रूप से नशीला पदार्थ मिलाकर खाना खिलाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
अब तक कई FIR और गिरफ्तारियां
इस मामले में अब तक कई FIR दर्ज हो चुकी हैं और कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक शिकायतों में यौन उत्पीड़न, पीछा करना, मानसिक दबाव और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
महिला कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप
कुछ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया गया और निजी जिंदगी को लेकर आपत्तिजनक सवाल पूछे गए। एक अन्य महिला कर्मचारी ने भी आगे आकर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है।
TCS ने अपनाई ‘Zero Tolerance Policy’
TCS ने बयान जारी कर कहा है कि कंपनी की Zero Tolerance Policy के तहत आरोपियों को सस्पेंड कर दिया गया है और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है।
मामले पर बढ़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद
यह मामला अब राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। कई नेताओं ने इसे गंभीर सुरक्षा और महिला उत्पीड़न का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि कुछ संगठनों ने जांच को निष्पक्ष रखने की अपील की है।

