नागपुर हत्याकांड: 24 घंटे में पकड़ा गया आरोपी, लेकिन पुलिस की एक गलती से छूटा; लापरवाही पर उठे सवाल

नागपुर : यशोधरानगर थाना क्षेत्र के टिपू सुल्तान चौक में मंगलवार रात हुई युवक की हत्या के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी को वारदात के 24 घंटे के भीतर पकड़ लिया, लेकिन गिरफ्तारी प्रक्रिया में हुई कानूनी त्रुटि के कारण न्यायालय ने आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए उसे रिहा करने के आदेश दे दिए।

धारदार हथियार से युवक की बेरहमी से हत्या

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मृतक की पहचान मोहम्मद सलमान मोहम्मद अशफाक (22), निवासी संघर्षनगर के रूप में हुई है। वहीं पुलिस ने मुख्य आरोपी मुजम्मिल उर्फ मुज्जू हसन अली (22), निवासी गंजखेत को हिरासत में लिया था।

पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात करीब 11 बजे सलमान एक कैफे में बैठा हुआ था। फोन पर बात करने के लिए जब वह कैफे के बाहर आया, तभी मुजम्मिल और उसके नाबालिग साथी ने उस पर हमला कर दिया।

हमलावरों ने छाती, कंधे और हाथ पर धारदार हथियार से गंभीर वार किए और मौके से फरार हो गए। घायल सलमान को तुरंत मेयो अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

एकतरफा प्रेम विवाद से जुड़ा था मामला

पुलिस जांच में सामने आया कि सलमान के परिवार का फैब्रिकेशन का व्यवसाय है। आरोपी मुजम्मिल कुछ समय पहले उनके कारखाने में काम करता था।

इसी दौरान उसने सलमान की बहन को परेशान करना शुरू कर दिया था। परिवार को इसकी जानकारी मिलने के बाद करीब दो साल पहले उसे नौकरी से निकाल दिया गया था।

आरोप है कि इसके बाद भी मुजम्मिल ने परेशान करना जारी रखा, जिसके बाद सलमान और उसके दोस्तों ने उसकी पिटाई की थी। इसी विवाद के चलते आरोपी के मन में सलमान के प्रति नाराजगी बनी हुई थी।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ा

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घटना के बाद यशोधरानगर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तलाश अभियान चलाया और मुख्य आरोपी मुजम्मिल सहित उसके नाबालिग साथी को हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद करने और आगे की जांच के लिए आरोपी की पुलिस हिरासत मांगी थी।

गिरफ्तारी प्रक्रिया में गलती, आरोपी को मिली राहत

बुधवार दोपहर पुलिस ने आरोपी मुजम्मिल को प्रथम श्रेणी न्याय दंडाधिकारी एम. डी. बिरहाड़े की अदालत में पेश किया। सरकारी पक्ष ने आरोपी की 14 जून तक पुलिस हिरासत की मांग की थी।

हालांकि बचाव पक्ष के वकीलों ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई और जरूरी दस्तावेज परिवार को उपलब्ध नहीं कराए गए।

अदालत ने गिरफ्तारी को बताया अवैध

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए तत्काल जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपी के कानूनी प्रक्रिया की कमी के कारण बाहर आने से जांच पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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