नागपुर से सामने आए कथित कोयला घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सख्त कदम उठाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक निजी कंपनी और दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (SECR) के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच में बड़े स्तर पर मिलीभगत और उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की अवैध बिक्री का खुलासा हुआ है।
घोटाले में इन आरोपियों के नाम सामने आए
इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में मेसर्स एसजे एंटरप्राइजेज और उसके संचालक अमित मैती का नाम सामने आया है। इसके अलावा SECR के कुछ अज्ञात अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं।
सीबीआई ने फिलहाल रेलवे अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन इस पूरे घोटाले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
उच्च गुणवत्ता वाला कोयला ‘वेस्ट’ बताकर बेचा गया
जांच में यह खुलासा हुआ कि डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग पर काम कर रही कंपनी ने उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को ‘रिजेक्ट’ या ‘वेस्ट मटेरियल’ दिखाकर अवैध रूप से इकट्ठा किया।
इसके बाद इस कोयले को खुले बाजार में बेचकर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
फर्जी गेट पास से बाहर निकाला गया कोयला
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि रेलवे के कुछ अधिकारियों ने कंपनी के साथ मिलकर फर्जी एंट्री पास (गेट पास) जारी किए।
- 21 और 24 मार्च 2026 को कुल 18 गेट पास जारी किए गए
- इन पास के जरिए करीब 720 मीट्रिक टन G-12 ग्रेड का कोयला बाहर निकाला गया
- बाद में इस कोयले को बाजार में बेच दिया गया
रेलवे और कंपनियों की मिलीभगत का खुलासा
मिली जानकारी के अनुसार, मेसर्स एसजे एंटरप्राइजेज और मेसर्स चड्डा ट्रेडिंग कंपनी को रेलवे वैगन और ट्रैक की सफाई तथा कोयला हैंडलिंग का काम सौंपा गया था।
जांच में सामने आया कि इसी काम की आड़ में कोयले की हेराफेरी की गई और अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया।
CBI की जांच जारी, बड़े खुलासों की संभावना
सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार के संकेत मिले हैं।
आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे और गिरफ्तारी होने की संभावना जताई जा रही है।

