नागपुर: धार्मिक उत्सव आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक हैं, लेकिन जब इन्हीं आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण, यातायात व्यवस्था और पुलिस के निर्देशों की अनदेखी के आरोप सामने आएं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
नागपुर में दही हंडी के दो आयोजनों को लेकर ऐसे ही सवाल सामने आए हैं। अजनी चौक में पुलिस की मौजूदगी और ध्वनि स्तर मापे जाने के बावजूद तेज आवाज में DJ बजाने का आरोप है। वहीं Orange City Square पर आयोजित दही हंडी कार्यक्रम के दौरान Ring Road की एक carriageway बंद होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है।
अजनी में 90 से 100 डेसिबल तक पहुंचा ध्वनि स्तर
धंतोली पुलिस के अनुसार, अजनी चौक पर आयोजित दही हंडी कार्यक्रम के दौरान 90 से 100 डेसिबल के बीच ध्वनि स्तर दर्ज किया गया। पुलिस ने आयोजक करण यादव और साउंड सिस्टम संचालक रजत विजय शाहू को आवाज कम करने के निर्देश दिए थे।
आरोप है कि निर्देश दिए जाने के बावजूद तेज आवाज में DJ बजता रहा। पुलिस द्वारा ध्वनि स्तर की दो बार जांच किए जाने की बात भी सामने आई है।
रात 10 बजे के बाद भी चलता रहा DJ
नियमों के अनुसार रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में लाउडस्पीकर या DJ बजाने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद आरोप है कि अजनी का कार्यक्रम रात करीब 10.45 बजे तक जारी रहा।
मामले में धंतोली पुलिस ने करण यादव और रजत विजय शाहू के खिलाफ BNS और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।
पुलिस के निर्देश के बावजूद नियमों की अनदेखी पर सवाल
इस घटना ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि मौके पर पुलिस मौजूद थी, ध्वनि स्तर की जांच की गई और आयोजकों को आवाज कम करने के निर्देश दिए गए, तो इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन कैसे जारी रहा?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में ध्वनि प्रदूषण और DJ को लेकर पुलिस प्रशासन पहले ही सख्त रुख अपना चुका है।
Orange City Square पर ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल
दूसरी ओर Orange City Square पर BJYM South West Nagpur के दही हंडी कार्यक्रम के दौरान Ring Road की एक carriageway बंद किए जाने को लेकर यातायात व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
बताया गया कि सड़क का हिस्सा बंद होने के कारण कुछ वाहन चालकों को divider opening तक पहुंचने के लिए गलत दिशा में वाहन चलाना पड़ा।
सड़क बंद होने पर जिम्मेदारी किसकी?
यदि किसी आम वाहन चालक द्वारा गलत दिशा में वाहन चलाया जाता है तो यातायात नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के कारण यदि बड़ी संख्या में वाहन चालकों को गलत दिशा में जाने की स्थिति बनती है, तो ट्रैफिक प्रबंधन की जिम्मेदारी किसकी होगी?
खासकर एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए ऐसी स्थिति गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
DJ और ध्वनि प्रदूषण को लेकर पुलिस की सख्ती पर सवाल
नागपुर पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील की ओर से ध्वनि प्रदूषण, DJ और लेजर लाइट को लेकर सख्ती बरतने की बात सामने आती रही है। ऐसे में नियमों के उल्लंघन के मामलों में केवल FIR तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय संबंधित DJ ऑपरेटर और साउंड सिस्टम प्रदाता की अनुमति तथा लाइसेंस की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई प्रशासन की ओर से स्पष्ट संदेश दे सकती है कि नियम सभी के लिए समान हैं।
देवेंद्र फडणवीस की तस्वीरों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा
इन आयोजनों को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर से आते हैं और शहर की राजनीति में उनका प्रभाव व्यापक है। ऐसे में उनके करीबी माने जाने वाले लोगों या उनसे जुड़े राजनीतिक आयोजनों में यदि नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आते हैं, तो राजनीतिक जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि किसी व्यक्ति की तस्वीर या राजनीतिक संबंध मात्र से किसी आयोजन में कानून उल्लंघन साबित नहीं होता। जिम्मेदारी संबंधित आयोजकों और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्रवाई के आधार पर ही तय होनी चाहिए।
आस्था के साथ कानून का पालन भी जरूरी
दही हंडी, गणेशोत्सव, पोला, मोहर्रम सहित सभी धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को लेकर नागरिकों की आस्था का सम्मान जरूरी है। लेकिन उत्सव के दौरान भी कानून और सार्वजनिक व्यवस्था का पालन अनिवार्य है।
धार्मिक कार्यक्रमों के नाम पर:
- रात 10 बजे के बाद ध्वनि नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
- निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में DJ नहीं बजना चाहिए।
- नियमों के विपरीत लेजर या बीम लाइट का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
- बिना उचित अनुमति मुख्य सड़कों को बंद नहीं किया जाना चाहिए।
- आम नागरिकों और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए।
अब कार्रवाई से मिलेगा बड़ा संदेश
अजनी मामले में FIR दर्ज होना पुलिस की कार्रवाई का हिस्सा है, लेकिन पूरे मामले से बड़ा सवाल यह है कि क्या नियमों का पालन कराने में सभी आयोजनों के साथ समान सख्ती बरती जाएगी?
नागपुर पुलिस से उम्मीद है कि वह आयोजकों, साउंड सिस्टम प्रदाताओं, कार्यक्रम की अनुमति और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की भी जांच करेगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि शहर में कानून किसी राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव से ऊपर है।
आस्था और उत्सव अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और कानून का सम्मान भी उतना ही जरूरी है। आखिरकार नागपुर में यह संदेश स्पष्ट होना चाहिए कि कानून सभी के लिए समान है।

