दिवाली की तैयारियों के बीच बढ़ा स्वास्थ्य पर खतरा! नागपुर में दमा और एलर्जी के मरीजों की बढ़ी परेशानी, डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाह

घर की सफाई से उड़ रही धूल, रंगों के केमिकल और फराळ के धुएं से बढ़ रहीं सांस संबंधी समस्याएं

नागपुर: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई, रंग-रोगन और पारंपरिक पकवान बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। लेकिन त्योहार की इन तैयारियों का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। बदलते तापमान, घरों में उड़ने वाली धूल, पेंट और केमिकल की तेज गंध तथा रसोई में तलने से निकलने वाले धुएं के कारण दमा, एलर्जी और साइनस के मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।

  • Save

श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. आकाश बलकी के अनुसार, पहले से एलर्जी या सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों में इन दिनों लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में दिवाली की तैयारियों के दौरान लापरवाही बरतना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

पुराने सामान की सफाई से बढ़ रहा धूल का खतरा

दिवाली से पहले घरों में पुराने फर्नीचर, अलमारियों, पर्दों और लंबे समय से रखे सामान की सफाई की जाती है। इस दौरान हवा में फैलने वाले धूल के कण सांस के जरिए श्वसन मार्ग में प्रवेश कर सकते हैं। इससे लगातार छींक आना, खांसी, गले में खराश और साइनस की समस्या बढ़ सकती है।

जिन लोगों को पहले से धूल से एलर्जी या सांस लेने में परेशानी है, उन्हें सफाई के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

रंग-रोगन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल भी नुकसानदायक

दिवाली के दौरान घरों में रंगाई-पुताई का काम भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। पेंट, वार्निश और थिनर जैसे रसायनों से निकलने वाली तेज गंध के कारण आंखों में जलन, बार-बार छींक आने और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

एलर्जी और श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों पर इन रसायनों का प्रभाव अधिक पड़ सकता है। इसलिए रंग-रोगन के दौरान घर में पर्याप्त हवा आने-जाने की व्यवस्था रखना जरूरी है।

  • Save

चकली, शेव और करंजी तलने से निकलने वाला धुआं भी खतरनाक

दिवाली के पारंपरिक पकवानों में चकली, शेव और करंजी जैसे व्यंजन बनाने के लिए घरों में तलने का काम शुरू हो जाता है। तेल को लगातार गर्म करने और पकवान तलने से निकलने वाला धुआं घर के अंदर की हवा को प्रदूषित कर सकता है।

यह धुआं विशेष रूप से दमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) से पीड़ित मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। इसके कारण सांस की नलियां सिकुड़ने, सांस लेने में कठिनाई और छाती में घरघराहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सफाई करते समय एन95 मास्क का करें इस्तेमाल

डॉ. आकाश बलकी के अनुसार, मौजूदा मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी मरीजों की परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में दिवाली की तैयारियों के दौरान कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।

  • घर की सफाई करते समय एन95 मास्क पहनें। उपलब्ध न होने पर नाक और मुंह को अच्छी तरह ढकने का प्रयास करें।
  • रंगाई-पुताई और पकवान तलने के दौरान खिड़कियां खुली रखें तथा एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें।
  • दमा और सीओपीडी से पीड़ित बुजुर्गों तथा बच्चों को धूलभरी सफाई और धुएं वाली जगहों से दूर रखें।
  • दमा के मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपना नियमित इनहेलर और जरूरी दवाएं पास रखें।
  • सांस लेने में अचानक परेशानी बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

सांस लेने में परेशानी हो तो नजरअंदाज न करें

  • Save

दिवाली के दौरान प्रदूषण और एलर्जी के कारण सांस फूलना, छाती में असहजता, गले में सूजन, बार-बार सर्दी होना, लगातार छींक आना, एलर्जी वाली खांसी और छाती में घरघराहट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लक्षणों को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अस्थमा के मरीजों को समय पर डॉक्टर से जांच और सलाह लेनी चाहिए।

त्योहार की खुशियों के साथ अपनी और परिवार की सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी सावधानी बरतकर धूल, धुएं और केमिकल के संपर्क से होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है।

डॉ. आकाश बलकी, श्वसन रोग विशेषज्ञ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link