एंजियोप्लास्टी के बाद भी लापरवाही पड़ सकती है भारी, दोबारा हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है

नागपुर: हृदय रोगी की बंद रक्तवाहिनी को एंजियोप्लास्टी के दौरान स्टेंट की मदद से खोलकर रक्तप्रवाह सामान्य किया जाता है। हालांकि, हृदयाघात के दौरान हृदय की मांसपेशियों को हुआ स्थायी नुकसान एंजियोप्लास्टी से ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए प्रक्रिया तकनीकी रूप से सफल होने के बावजूद लापरवाही बरतने पर दोबारा हृदयाघात, हृदय विफलता और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बना रह सकता है।

  • Save

स्टेंट लगाने के बाद क्या रक्तवाहिनी पूरी तरह खुल जाती है?

एंजियोप्लास्टी के दौरान गुब्बारे की मदद से रक्तवाहिनी में जमा प्लाक यानी वसा की परत को रक्तवाहिनी की दीवार की ओर दबाया जाता है। इसके बाद वहां स्टेंट लगाया जाता है, जिससे रक्तप्रवाह के लिए रास्ता खुल जाता है। हालांकि, स्टेंट लगाने से प्लाक शरीर से समाप्त नहीं होता, बल्कि उसे दबाकर किनारे किया जाता है।

हृदय की मांसपेशियों को नुकसान होने पर क्या खतरा रहता है?

विवेका अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत जगताप के अनुसार, हृदयाघात के दौरान रक्त की आपूर्ति बाधित होने से जिन हृदय मांसपेशियों की कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है, वे दोबारा जीवित नहीं होतीं। इससे हृदय की रक्त पंप करने की क्षमता कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप भविष्य में हृदय विफलता, हृदय की धड़कन अनियमित होने और अचानक हृदयाघात से मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है।

कोरोनरी स्टेंट क्या होता है और इसकी आवश्यकता कब पड़ती है?

  • Save

स्टेंट धातु या शरीर में घुलने वाले पदार्थ से बनी अत्यंत बारीक, जालीदार और स्प्रिंग जैसी नली होती है। हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली रक्तवाहिनियों में वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों के कारण गंभीर अवरोध बनने या अचानक गंभीर हृदयाघात होने पर रक्तप्रवाह सामान्य करने के लिए स्टेंट की आवश्यकता पड़ सकती है।

रक्तवाहिनियों में वसा जमा होने की प्रक्रिया रुकती नहीं

स्टेंट लगाने के बाद भी रक्तवाहिनियों में वसा जमा होने की प्रक्रिया अपने आप बंद नहीं होती। उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और उच्च रक्तचाप नियंत्रित नहीं रहने पर शरीर की अन्य रक्तवाहिनियों में भी वसा जमा होती रह सकती है।

स्टेंट के बाद दवाएं अपने आप बंद न करें

स्टेंट लगने के बाद मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए। रक्तचाप, रक्त में शर्करा और लिपिड प्रोफाइल की नियमित जांच कराना आवश्यक है। छाती में भारीपन, अचानक पसीना आना या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

दोबारा ब्लॉकेज होने पर अत्याधुनिक उपचार विकल्प

पुराने स्टेंट में दोबारा ब्लॉकेज होने, गुब्बारे या कैथेटर से न खुलने वाले कठोर अवरोध तथा हृदयाघात के दौरान रक्तवाहिनी में बड़ी मात्रा में रक्त के थक्के जमा होने जैसी परिस्थितियों में लेजर (ईएलसीए), रोटाब्लेशन और इंट्रावैस्कुलर लिथोट्रिप्सी (आईवीएल) जैसी उपचार पद्धतियों का उपयोग किया जा सकता है।

  • Save

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में नमक, तले हुए खाद्य पदार्थ, ट्रांस फैट और मिठाइयों की मात्रा सीमित रखनी चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और रेशेदार खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार प्रतिदिन 30 से 40 मिनट तेज चलना या हल्का व्यायाम किया जा सकता है।

धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी जरूरी

हृदय रोगियों को धूम्रपान और तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद करना चाहिए। तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान जैसी गतिविधियों को अपनाने के साथ प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना भी महत्वपूर्ण है।

नियमित उपचार और जांच से जोखिम कम करने में मदद

डॉ. प्रशांत जगताप के अनुसार, एंजियोप्लास्टी और स्टेंट के बाद भी मरीजों के लिए नियमित जांच, चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन और आवश्यक सावधानियां जारी रखना जरूरी है। एंजियोप्लास्टी बंद रक्तवाहिनी को खोलती है, लेकिन हृदय रोग के मूल जोखिम कारकों पर नियंत्रण बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • Save

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link