गुस्से में घर छोड़ने से लेकर रेलवे में भटकने तक, 9 महीने में 232 बच्चों की सुरक्षित घर वापसी

नागपुर रेलवे पुलिस के ‘चिल्ड्रेन री-यूनिफिकेशन’ अभियान को बड़ी सफलता; फरवरी 2026 से अब तक बिछड़े बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया गया

नागपुर: गुस्से में घर छोड़कर निकलने वाले, सपनों की तलाश में मुंबई-दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में सवार होने वाले या भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों पर रास्ता भटक जाने वाले बच्चों के लिए नागपुर रेलवे पुलिस सहारा बन रही है। पिछले नौ महीनों में 232 बच्चों को तलाश कर सुरक्षित उनके माता-पिता और परिजनों तक पहुंचाया गया है। रेलवे पुलिस का ‘चिल्ड्रेन री-यूनिफिकेशन’ अभियान फरवरी 2026 से चलाया जा रहा है। इस पहल से कई परिवारों को अपने बिछड़े बच्चों से दोबारा मिलने की खुशी मिली है।

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बच्चों का भरोसा जीतकर शुरू होती है तलाश

कई बच्चे डर या घबराहट के कारण पुलिस से बात करने में भी हिचकिचाते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मी उनसे प्यार और संवेदनशीलता के साथ बातचीत कर उनका विश्वास जीतते हैं। बच्चों से मिली जानकारी के आधार पर उनके माता-पिता और परिजनों की तलाश की जाती है।

यदि बच्चा अपना नाम, पता या परिवार का संपर्क नंबर नहीं बता पाता, तो पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करती है कि वह किस ट्रेन से आया है। इसके बाद संबंधित राज्यों की पुलिस से संपर्क कर गुमशुदगी की शिकायतों की पड़ताल की जाती है। आपसी समन्वय से परिवार का पता लगाकर बच्चे को सुरक्षित उनके हवाले किया जाता है।

गुस्से में घर छोड़ देते हैं कई बच्चे

पुलिस के सामने ऐसे कई मामले आते हैं, जिनमें बच्चे घर में डांट पड़ने या किसी बात से नाराज होकर बिना बताए निकल जाते हैं। कुछ बच्चे ट्रेन में बैठकर दूर तक पहुंच जाते हैं, जबकि कुछ भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की पहचान करना और उनके परिजनों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण होता है। कई बार बच्चों को अपना नाम, घर का पता या माता-पिता का मोबाइल नंबर तक याद नहीं रहता। ऐसे में रेलवे पुलिस की सतर्कता और जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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छह प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर विशेष निगरानी

नागपुर रेलवे पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में आने वाले छह प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी रखी जाती है। इनमें शामिल हैं:

  • नागपुर
  • इतवारी
  • वर्धा
  • गोंदिया
  • बडनेरा
  • अकोला

इन स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनों और स्टेशन परिसर में अकेले घूमते या संदिग्ध परिस्थितियों में दिखाई देने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अभियान का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें असामाजिक तत्वों के चंगुल में फंसने से बचाना भी है।

रेलवे पुलिस अधीक्षक मंगेश शिंदे के मार्गदर्शन में अभियान

रेलवे पुलिस अधीक्षक मंगेश शिंदे के मार्गदर्शन में ‘चिल्ड्रेन री-यूनिफिकेशन’ अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे पुलिस के अधिकार क्षेत्र के छह थानों के माध्यम से ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में बच्चों की सुरक्षा पर नजर रखी जाती है।

बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार, उनकी पहचान की पुष्टि और दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय के जरिए उन्हें परिवार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

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बच्चों की सुरक्षा और परिवार से मिलाना प्राथमिकता

रेलवे स्टेशनों पर अकेले घूमते बच्चों की समय रहते पहचान करना उन्हें संभावित खतरे से बचाने में मददगार साबित हो सकता है। नागपुर रेलवे पुलिस का यह अभियान बिछड़े और घर से दूर पहुंचे बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

नोट: उपलब्ध समाचार सामग्री में छह रेलवे स्टेशनों के अनुसार बच्चों की संख्या वाली तालिका स्पष्ट नहीं है। इसलिए यहां केवल कुल 232 बच्चों की सुरक्षित घर वापसी का आंकड़ा दिया गया है।

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