नागपुर: स्वीडन के एक ग्राहक को नकली लेबल वाली ‘MOTS-C’ दवा बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। महाराष्ट्र अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) की जांच में दवा में सक्रिय औषधीय घटक नहीं मिला। इस मामले में ‘स्कायलाईन इम्पेक्स’ के भागीदार यश सेवेंद्र बेरी, पंजाब के कथित आपूर्तिकर्ता मनहीर सिंह और कथित फर्जी निर्माता ‘डॉ. ग्लेक्स फार्माकेम’ समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ जरीपटका पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
स्वीडन के ग्राहक ने IndiaMART के जरिए खरीदी दवाएं
जांच के अनुसार, स्वीडन के एक ग्राहक ने IndiaMART के माध्यम से ‘स्कायलाईन इम्पेक्स’ से MOTS-C समेत विभिन्न रिसर्च पेप्टाइड्स खरीदे थे। ग्राहक द्वारा विदेश की प्रयोगशाला में MOTS-C के नमूने की जांच कराने पर उसमें सक्रिय औषधीय घटक नहीं मिला।
‘Peptide Sciences USA’ का लेबल भी निकला नकली
दवा पर ‘Peptide Sciences USA’ कंपनी के नाम का लेबल लगाया गया था। संबंधित कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह लेबल फर्जी था। इसके बाद स्वीडन के ग्राहक ने मामले की शिकायत FDA से की।
1.90 लाख रुपये लेकर भेजा गया था माल
शिकायत के अनुसार, स्वीडन के ग्राहक से 1 लाख 90 हजार 500 रुपये अग्रिम लेकर माल भेजा गया था। आरोप है कि सीमा शुल्क से बचने के लिए भेजे गए माल की कीमत केवल 200 अमेरिकी डॉलर दर्शाई गई।
कई पेप्टाइड्स की अवैध खरीद का खुलासा
25 जून को CDSCO और FDA की संयुक्त टीम ने ‘स्कायलाईन इम्पेक्स’ की जांच की। इस दौरान CJC Ipamorelin, Tesamorelin, Somatropin और MOTS-C समेत विभिन्न पेप्टाइड्स की कथित अवैध खरीद का पता चला।
इंजेक्शन के लिए पानी भी गुणवत्ता जांच में फेल
जांच के दौरान ‘Bacteriostatic Water for Injection’ के नमूने भी लिए गए। गुणवत्ता परीक्षण में ये नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। वहीं, कथित निर्माता ‘डॉ. ग्लेक्स फार्माकेम’ का दिया गया पता भी जांच में फर्जी पाया गया।
स्कायलाईन इम्पेक्स के दोनों दवा लाइसेंस रद्द
कार्रवाई के बाद प्रशासन ने ‘स्कायलाईन इम्पेक्स’ के दोनों औषधि बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। जरीपटका पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

