नागपुर: राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्राधिकरणों में महत्वपूर्ण पदों के चुनाव के लिए पात्रता के नियम कड़े कर दिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार प्रबंधन परिषद के कुछ पदों और अध्ययन मंडल (Board of Studies) के अध्यक्ष पद के लिए अब विश्वविद्यालय से संबंधित कम से कम 5 वर्ष का परीक्षा कार्य अनुभव अनिवार्य होगा।
प्रबंधन परिषद चुनाव के लिए पीएच.डी. और अनुभव जरूरी
सीनेट सदस्य प्राचार्य को प्रबंधन परिषद का चुनाव लड़ने के लिए पीएच.डी. और कम से कम 5 वर्ष का विश्वविद्यालय-संबंधित परीक्षा कार्य अनुभव होना आवश्यक होगा। हालांकि, 13 अक्टूबर 2000 से पहले प्राचार्य नियुक्त किए गए व्यक्तियों को पीएच.डी. की अनिवार्यता से छूट दी गई है।
सीनेट शिक्षक सदस्य के लिए अनुभव की शर्त
सीनेट सदस्य शिक्षक के लिए पीएच.डी. के साथ 10 वर्ष का शिक्षण अनुभव अथवा बिना पीएच.डी. के 15 वर्ष का शिक्षण अनुभव आवश्यक होगा। दोनों ही परिस्थितियों में 5 वर्ष का परीक्षा कार्य अनुभव अनिवार्य रहेगा।
शैक्षणिक परिषद के शिक्षक सदस्य के लिए अतिरिक्त शर्तें
शैक्षणिक परिषद के शिक्षक सदस्य पद के लिए पीएच.डी., 15 वर्ष का शिक्षण अनुभव और कम से कम दो पीएच.डी. विद्यार्थियों को डिग्री दिलाने का मार्गदर्शन आवश्यक होगा। इसके अलावा दो पुस्तकें या तीन शोधपत्र प्रकाशित करने तथा 5 वर्ष का परीक्षा कार्य अनुभव होने की शर्त भी रखी गई है।
अध्ययन मंडल अध्यक्ष के लिए भी कड़े नियम
अध्ययन मंडल अध्यक्ष पद के लिए पीएच.डी., 15 वर्ष का शिक्षण अनुभव, स्नातकोत्तर स्तर पर अध्यापन, पीएच.डी. मार्गदर्शन और शोध प्रकाशन जैसी पात्रताएं निर्धारित की गई हैं। इसके साथ 5 वर्ष का परीक्षा कार्य अनुभव भी अनिवार्य होगा।
आरक्षित सीटों का निर्धारण लॉटरी से
प्रबंधन परिषद की आरक्षित सीटों के प्रारंभिक निर्धारण के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वर्ष 2023 में प्रबंधन प्रतिनिधि सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी), प्राचार्य सीट ओबीसी, शिक्षक सीट अनुसूचित जाति (एससी) और पंजीकृत स्नातक सीट विमुक्त जाति/घुमंतू जनजाति के लिए आरक्षित थी।
चुनाव अधिसूचना 20 दिन पहले जारी होगी
नए नियमों के अनुसार चुनाव की अधिसूचना मतदान की तारीख से कम से कम 20 स्पष्ट दिन पहले जारी करनी होगी। प्रत्येक नामांकन के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

