एशिया प्रशांत क्षेत्र में डिलीवरी लागत में करीब 19% की बढ़ोतरी, भारत भी प्रभावित

ईंधन संकट और बढ़ती लागत ने बढ़ाई लॉजिस्टिक्स कंपनियों की चिंता

लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस कंपनी FarEye की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मार्च से मई के बीच भारत सहित पूरे एशिया प्रशांत (APAC) क्षेत्र में डिलीवरी लागत में साल-दर-साल औसतन 18.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती लागत ने लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेक्टर की चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है।

मध्य पूर्व संघर्ष का पड़ा सीधा असर

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रिपोर्ट के अनुसार, यह सर्वेक्षण ऐसे समय में किया गया जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ गया। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी नेटवर्क पर देखने को मिला।

भारत में ईंधन और ट्रैफिक बने बड़ी वजह

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बढ़ती ईंधन कीमतें, ड्राइवरों का बढ़ता वेतन और शहरी क्षेत्रों में भारी ट्रैफिक डिलीवरी लागत बढ़ने के मुख्य कारण हैं। खासकर बड़े शहरों में समय पर डिलीवरी करना कंपनियों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

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पहली बार डिलीवरी फेल होने की दर 30% तक

भारत के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में फर्स्ट-अटेम्प्ट डिलीवरी फेलियर रेट यानी पहली बार में डिलीवरी न हो पाने की दर 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, यही स्थिति कंपनियों के मुनाफे को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है।

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कंपनियों को खर्च दिख रहा, लेकिन असली समस्या नहीं

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिकांश ऑपरेटर यह तो देख पा रहे हैं कि पैसा ईंधन, श्रम, वाहन और कैरियर बिल पर खर्च हो रहा है, लेकिन वे यह समझ नहीं पा रहे कि वास्तविक लागत किस स्तर पर और क्यों बढ़ रही है। यही वजह है कि लॉजिस्टिक्स सेक्टर में लागत नियंत्रण बड़ी चुनौती बन गया है।

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