नागपुर: रोजाना खाने में शामिल होने वाली हरी-भरी सब्जियां अब सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं। नागपुर की पहचान मानी जाने वाली नाग नदी के प्रदूषित पानी से उगाई जा रही सब्जियों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शहर के बाहरी इलाकों में करीब 3 से 4 हजार एकड़ क्षेत्र में इसी जहरीले पानी से खेती की जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हेवी मेटल्स का खतरनाक असर
तज्ज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, नाग नदी के पानी में जिंक, लेड (शिसा), आर्सेनिक जैसे खतरनाक हेवी मेटल्स बड़ी मात्रा में पाए गए हैं। ये जहरीले तत्व केवल पानी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सब्जियों के जरिए सीधे मानव शरीर में पहुंच जाते हैं, जिससे यह एक तरह का स्लो पॉयजन बन जाता है।
किन-किन इलाकों में हो रही है खेती
नदी किनारे के किसान पंप के जरिए प्रदूषित पानी को आधा से एक किलोमीटर तक खींचकर खेतों तक ले जाते हैं। इस पानी से पालक, मेथी, फूलगोभी, बैंगन जैसी सब्जियों के साथ-साथ धान और गेहूं की भी खेती की जा रही है। यह खेती कळमना, बिडगांव, पावनगांव, पुनापुर, पारडी, दिघोरी, बहादुरा सहित कई इलाकों में बड़े स्तर पर चल रही है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में अधिक मात्रा में हेवी मेटल्स जाने से किडनी और लिवर की बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा पाचन तंत्र प्रभावित होता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चों की शारीरिक और मानसिक विकास पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
तज्ज्ञ की चेतावनी
कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश कडू के अनुसार, “पानी में मौजूद हेवी मेटल्स को सब्जियां आसानी से सोख लेती हैं, जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक हैं। इसलिए पानी और मिट्टी की नियमित जांच जरूरी है और सिंचाई के पानी में इन तत्वों की मात्रा तय सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।”
प्रशासन की लापरवाही और खतरा
अब तक नाग नदी के पानी की नियमित जांच नहीं हुई है, न ही वहां की मिट्टी और फसलों का वैज्ञानिक परीक्षण किया गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यही सब्जियां कळमना और कॉटन मार्केट सहित शहर की प्रमुख मंडियों में बेची जा रही हैं और सीधे लोगों की थाली तक पहुंच रही हैं।
बढ़ सकता है बड़ा स्वास्थ्य संकट
यदि समय रहते नदी का प्रदूषण नहीं रोका गया और सब्जियों की जांच नहीं की गई, तो आने वाले समय में नागपुर के नागरिकों के स्वास्थ्य पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों ने इसे गंभीर चेतावनी मानते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

