नागपुर: शहर में फर्जी वाहन पंजीकरण के जरिए स्क्रैप घोषित भारी वाहनों को दोबारा सड़कों पर चलाने के कथित रैकेट का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने गुप्त सूचना के आधार पर कपिल नगर पुलिस थाना क्षेत्र में छापेमारी कर तीन हाइड्रो क्रेन जब्त की हैं। इन वाहनों पर कथित तौर पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर उनका संचालन किया जा रहा था। जब्त किए गए तीनों वाहनों की कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है। इस मामले में फिरोज आलम और अजगर हुसैन नामक दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
दूसरे राज्य में स्क्रैप घोषित वाहनों को नागपुर में चलाने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया है कि दूसरे राज्य में स्क्रैप घोषित की जा चुकी JCB और हाइड्रो क्रेन जैसी भारी मशीनों को कथित तौर पर नागपुर में चलाया जा रहा था।
आरोपियों ने एक वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल दूसरे वाहन की पहचान छिपाने के लिए किया। इस तरह स्क्रैप घोषित वाहनों को फर्जी पहचान देकर सार्वजनिक सड़कों पर संचालित किया जा रहा था।
क्राइम ब्रांच यूनिट-2 की छापेमारी में तीन हाइड्रो क्रेन जब्त
क्राइम ब्रांच यूनिट-2 को इन संदिग्ध भारी वाहनों की आवाजाही और संचालन के संबंध में गोपनीय जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने कपिल नगर थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए तीन हाइड्रो क्रेन को रोका।
वाहनों के दस्तावेजों और रजिस्ट्रेशन नंबरों की जांच करने पर गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने तीनों वाहनों को जब्त कर लिया।
फिरोज आलम और अजगर हुसैन के खिलाफ मामला दर्ज
इस कथित रैकेट में पुलिस ने दो आरोपियों की पहचान की है।
- फिरोज आलम – निवासी यशोधरा नगर।
- अजगर हुसैन – निवासी यशोधरा नगर।
दोनों के खिलाफ वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबरों के कथित फर्जी इस्तेमाल और अन्य अनियमितताओं को लेकर मामला दर्ज किया गया है।
स्क्रैप वाहनों की जानकारी छिपाकर सड़क पर दौड़ाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, आरोपियों को कथित तौर पर जानकारी थी कि संबंधित मशीनें पहले ही स्क्रैप घोषित की जा चुकी हैं और सड़क पर चलाने के लिए असुरक्षित हो सकती हैं। इसके बावजूद उन्हें वैध पंजीकरण के बिना चलाया जा रहा था।
जांच में वाहन मालिकाना हक हस्तांतरण से जुड़े निर्धारित नियमों के उल्लंघन की आशंका भी सामने आई है।
कपिल नगर पुलिस थाने में BNS और मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला
इस मामले में कपिल नगर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
क्या बड़े रैकेट से जुड़े हैं अन्य लोग? पुलिस की जांच जारी
तीन भारी वाहनों की जब्ती के बाद पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ये वाहन कितने समय से कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों के सहारे नागपुर की सड़कों पर चल रहे थे।
जांच के प्रमुख बिंदु हैं:
- स्क्रैप घोषित वाहनों को किस राज्य और किस माध्यम से खरीदा गया?
- फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबरों का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था?
- क्या अन्य वाहनों पर भी इसी तरह फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई हैं?
- क्या इस पूरे नेटवर्क में वाहन डीलर, बिचौलिए या अन्य लोग भी शामिल हैं?
सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं स्क्रैप वाहन
स्क्रैप घोषित भारी वाहनों को कथित फर्जी पहचान के जरिए दोबारा सड़कों पर चलाना गंभीर सड़क सुरक्षा का मुद्दा है। ऐसे वाहनों की तकनीकी स्थिति और सड़क पर चलने की क्षमता संदिग्ध हो सकती है। यदि इनका संचालन बिना वैध पंजीकरण और सुरक्षा जांच के किया जाता है, तो इससे वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई ने शहर में भारी वाहनों के पंजीकरण, दस्तावेजों के सत्यापन और स्क्रैप घोषित वाहनों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

