388 साइबर शिकायतों से जुड़ा नेटवर्क आया सामने, दो मामलों में 80 लाख रुपये की वापसी और 1.30 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज
नागपुर: साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर करने वाले म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क का साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जांच में महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों की 388 साइबर शिकायतों से जुड़े कुल 103 करोड़ 13 लाख 94 हजार 458 रुपये के लेन-देन सामने आए हैं। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और ठगी की रकम को वापस दिलाने के लिए कार्रवाई की गई है।
केसर इंडिया लिमिटेड के खाते से 4.45 करोड़ रुपये ट्रांसफर
नागपुर के सदर क्षेत्र स्थित केसर इंडिया लिमिटेड के बैंक खाते से कथित तौर पर 4 करोड़ 45 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए थे। जानकारी के अनुसार, अज्ञात आरोपी ने मोबाइल हैक कर कंपनी के व्हाट्सऐप अकाउंट के जरिए लेखापाल से संपर्क किया।
आरोपी ने कंपनी के खाते में उपलब्ध रकम की जानकारी लेने के बाद मुंबई स्थित एक बैंक खाते में तत्काल पैसे भेजने के लिए कहा। संदेश कंपनी के संचालक की ओर से आया है, ऐसा समझकर लेखापाल ने आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर दी।
बाद में जब लेखापाल ने संचालक से सीधे संपर्क किया, तब धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद शिकायतकर्ता को 80 लाख रुपये वापस दिलाए गए।
संचालक की तस्वीर वाले व्हाट्सऐप नंबर से 1.30 करोड़ की ठगी
दूसरे मामले में अमित प्रदीप घाटे को व्हाट्सऐप पर एक ऐसे नंबर से संदेश मिला, जिस पर कंपनी के मालिक की तस्वीर लगी हुई थी। संदेश में एक बैंक खाते में रकम जमा करने के लिए कहा गया था।
संदेश को मालिक का निर्देश समझकर अमित प्रदीप घाटे ने आरटीजीएस के जरिए 1 करोड़ 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में मालिक से सीधे संपर्क करने पर पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था और उनके नाम का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की गई थी।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित बैंक खाते में पूरी 1.30 करोड़ रुपये की रकम फ्रीज कर दी।
म्यूल बैंक खातों के जरिए रकम छिपाने की कोशिश
जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को पहले म्यूल बैंक खातों में जमा करते थे और फिर उसे कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर देते थे। कई खातों के इस्तेमाल के कारण रकम के वास्तविक स्रोत और उसके अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस जांच में इस नेटवर्क से जुड़ी 388 साइबर शिकायतें सामने आईं, जिनमें कुल 103.13 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन दर्ज किए गए। खबर के अनुसार, इस कार्रवाई में 11 आरोपियों की गिरफ्तारी का उल्लेख है, जबकि केसर इंडिया लिमिटेड के मामले में 12 आरोपियों की गिरफ्तारी की अलग जानकारी भी दी गई है।
हजारों आवेदनों पर कार्रवाई, पीड़ितों को करोड़ों रुपये लौटाए
पुलिस की जानकारी के अनुसार, एमआरएम प्रणाली के तहत 10,774 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 7,028 आवेदनों पर कार्रवाई की गई। इस प्रक्रिया के दौरान 3 करोड़ 20 लाख 68 हजार 132 रुपये प्राप्त किए गए, जबकि 1 करोड़ 75 लाख 3 हजार 715 रुपये पीड़ितों को वापस किए गए। शेष रकम लौटाने की प्रक्रिया जारी है।
वहीं, जीआरएम प्रणाली के तहत प्राप्त 988 आवेदनों में से 861 पर कार्रवाई की गई।
व्हाट्सऐप पर पैसे मांगने वाले संदेशों से रहें सावधान
पुलिस उपायुक्त महक स्वामी ने नागरिकों से साइबर ठगी के मामलों में सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि व्हाट्सऐप पर किसी परिचित व्यक्ति या अधिकारी की तस्वीर लगे नंबर से पैसे मांगने वाला संदेश आने पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।
पैसे ट्रांसफर करने से पहले संबंधित व्यक्ति से उसके ज्ञात और सत्यापित नंबर पर सीधे संपर्क कर निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध संदेश या लेन-देन की स्थिति में तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें।

