नागपुर : नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा के पूर्व विधायक संदीप जोशी की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार रहे जोशी इस बार न तो पार्टी की प्रचार समिति में दिखाई दे रहे हैं और न ही चुनाव प्रचार के मैदान में सक्रिय नजर आ रहे हैं। ऐसे में भाजपा के भीतर सवाल उठने लगे हैं कि उन्हें प्रचार से दूर रखा गया है या उन्होंने खुद दूरी बना ली है।
कुछ महीने पहले राजनीतिक संन्यास की घोषणा
संदीप जोशी ने कुछ महीने पहले अचानक सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। उस समय उनके फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद जोशी दोबारा भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखाई देने लगे थे।
पिछले चुनाव में जोशी को मिला था टिकट
पिछले नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा ने तत्कालीन मौजूदा विधायक अनिल सोले का टिकट काटकर संदीप जोशी को उम्मीदवार बनाया था। उस समय चर्चा थी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सहमति से जोशी को टिकट दिया गया था। हालांकि, चुनाव में जोशी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें विधान परिषद में अवसर मिला।
इस बार प्रचार से दूरी क्यों?
इस बार भाजपा ने चुनाव के लिए प्रचार समिति की घोषणा की है, लेकिन संदीप जोशी न तो समिति में दिखाई दे रहे हैं और न ही चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर आ रहे हैं। वहीं, पूर्व विधायक अनिल सोले के बागी होकर चुनाव मैदान में उतरने के कारण जोशी की अनुपस्थिति को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा और तेज हो गई है।
भाजपा के भीतर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं कि पार्टी ने संदीप जोशी को प्रचार से दूर रखा है या उन्होंने स्वयं दूरी बनाए रखी है।
“पार्टी जिम्मेदारी देगी तो पूरी ताकत से काम करूंगा”
भाजपा के भीतर चल रही चर्चाओं के संबंध में ‘लोकमत’ ने संदीप जोशी से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि “मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं। पार्टी ने जिम्मेदारी दी तो पूरी ताकत से सुधाकर कोहळे के लिए काम करूंगा। अन्यथा शांत रहना पसंद करूंगा।”
जोशी का यह बयान पदवीधर चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा में आगे की भूमिका पर नजर
पदवीधर चुनाव में भाजपा के सामने सुधाकर कोहळे आधिकारिक उम्मीदवार हैं, जबकि अनिल सोले के बागी होकर मैदान में उतरने से मुकाबले का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में संदीप जोशी की भूमिका क्या रहती है, इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

