मंजूर 21 बेड, भर्ती 47 मरीज
नागपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के स्त्रीरोग एवं प्रसूति विभाग के वार्ड नंबर 30 में मरीजों की संख्या निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक पहुंच गई है। मंगलवार शाम 5 बजे तक 21 मंजूर बेड वाले इस वार्ड में 47 मरीज भर्ती थे। यानी वार्ड में निर्धारित क्षमता से 26 मरीज अधिक थे।
हर एक बेड पर औसतन 2 से अधिक मरीज
वार्ड की क्षमता के मुकाबले मरीजों की संख्या करीब 224 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इसका अर्थ है कि प्रत्येक मंजूर बेड पर औसतन 2.24 मरीज का भार था। रात में और मरीज आने की संभावना के चलते स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई गई।
प्रसूति के लिए पहुंची महिला को बेड का इंतजार
नौ महीने तक गर्भ में बच्चे को संभालने के बाद प्रसव के लिए मेडिकल पहुंची एक गर्भवती महिला ने मंगलवार को बेड की मांग की। हालांकि, उपलब्ध बेड को लेकर संतोषजनक जानकारी देने के बजाय परिजनों को वार्ड में लगाया गया मरीजों की जानकारी वाला चार्ट दिखाया गया। इसी चार्ट की तस्वीर एक परिजन ने साझा की, जिसमें 21 बेड के मुकाबले 47 मरीज भर्ती होने की जानकारी दर्ज थी।
वार्ड 22 और 30 में सबसे ज्यादा भीड़
मेडिकल के स्त्रीरोग एवं प्रसूति विभाग में कुल छह वार्ड हैं। इनमें वार्ड नंबर 22 और 30 में लेबर रूम होने के कारण मरीजों की संख्या अधिक रहती है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के अलावा गंभीर और जटिल मामलों के कारण भी इन वार्डों पर लगातार दबाव बना रहता है।
अतिरिक्त मरीजों से डॉक्टर और नर्सों पर भी बढ़ा काम का दबाव
मंजूर क्षमता से 26 अतिरिक्त मरीज होने के कारण गर्भवती महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सीमित मानव संसाधन और बुनियादी सुविधाओं के बीच अधिक मरीजों का इलाज करने से डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर काम का दबाव भी बढ़ रहा है।
गंभीर मरीजों को वापस भेजना आसान नहीं
मेडिकल अस्पताल में केवल नागपुर शहर ही नहीं, बल्कि विदर्भ के विभिन्न जिलों और आसपास के राज्यों से भी गंभीर एवं जटिल मामलों के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण गंभीर मरीजों को उपचार से इनकार करना या वापस भेजना आसान नहीं है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच बढ़ती मरीज संख्या का भार अस्पताल प्रशासन पर बना हुआ है।

