डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर 72 वर्षीय महिला से 45.50 लाख की ठगी, आतंकी फंडिंग के नाम पर बनाया दबाव

मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन

नागपुर में साइबर अपराधियों ने 72 वर्षीय महिला को डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर 45 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को मुंबई के कुलाबा थाने का पुलिस अधिकारी बताकर महिला को फोन किया और उसके नाम पर खुले बैंक खाते से 2 करोड़ रुपये के बेनामी लेनदेन का दावा किया।

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आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग का आरोप लगाकर डराया

खामला के श्रीराम नगर निवासी मालती पांडुरंग भाजीपाले (72) को 7 से 20 सितंबर के बीच आरोपियों ने फोन किया। उन्होंने महिला पर आरोप लगाया कि उसके बैंक खाते से हुए कथित लेनदेन का इस्तेमाल देश विरोधी और आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में किया गया है।

आरोपियों ने महिला को बताया कि इस मामले में पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सुप्रीम कोर्ट और रिजर्व बैंक की ओर से कार्रवाई की जा रही है और उसके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है।

फर्जी अरेस्ट वारंट भेजकर किया भयभीत

साइबर अपराधियों ने महिला को गिरफ्तार करने की धमकी देते हुए दावा किया कि उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है। इसके बाद मामले को रफा-दफा करने के नाम पर उससे बड़ी रकम की मांग की गई।

महिला और उसके परिवार की निजी जानकारी हासिल करने के बाद आरोपियों ने दबाव और बढ़ा दिया। महिला को विश्वास दिलाने के लिए आरोपियों ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों के नाम से फर्जी अरेस्ट वारंट और अन्य दस्तावेज भी भेजे।

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वर्षों की जमा पूंजी कर दी आरोपियों के खाते में ट्रांसफर

घटना से डरी हुई महिला ने आरोपियों के बताए बैंक खाते में अपनी वर्षों की पूरी जमा पूंजी 45 लाख 50 हजार रुपये जमा कर दिए। रकम ट्रांसफर करने के बाद महिला को ठगी का एहसास हुआ।

इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

साइबर थाना पुलिस ने शुरू की जांच

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपियों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जानकारी के आधार पर जांच कर रही है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध

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इस तरह की ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल या फोन पर निगरानी रखने का दावा कर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन पर डराकर पैसे जमा कराने की मांग किए जाने पर तुरंत सतर्क रहें।

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